धरने पर बैठे कोटा में बिहार के छात्र, नीतीश कुमार पिघलने को तैयार नहीं

Bihar students stranded in Kota
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Ground Report | News Desk

उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के छात्रों को उनके मुख्यमंत्रियों ने घर वापस लाने के लिए कोटा में बसें भेजी लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने छात्रों को बिहार नहीं लाना चाहते। जो छात्र वापस उन्होंने भी बिहार के मुख्यमंत्री से अपील कर कहा कि वे छात्रों को घर वापस ले आएं क्योंकि ऐसी स्थिति में छात्र चिंतित हैं वे पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। लेकिन नीतीश कुमार टस से मस नहीं हुए। अब इन छात्रों ने धरने पर बैठने का फैसला लिया है जिससे नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ गया है।

मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेस एग्जाम्स की कोचिंग कर रहे बिहार के करीब 11 हजार छात्र-छात्राएं लॉकडाउन की वजह से राजस्थान के कोटा में फंसे हुए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य सरकारें अपने राज्य के बच्चों को विशेष व्यवस्था करके घर पहुंचा चुकी है। बिहार के बच्चों द्वारा लगातार आग्रह करने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो इन लोगों ने गांधीवादी तरीका अपना लिया है। उपवास के जरिए ये छात्र बिहार सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें भी दूसरे राज्यों के बच्चों की तरह कोटा से निकालकर घर पहुंचाया जाए।

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इस बीच, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपील की है कि जिन राज्यों के विद्यार्थी अभी भी कोटा में फंसे हुए हैं, उन्हें उनकी सरकारें घर पहुंचाने में सहयोग करे। राजस्थान सरकार इसके लिए बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सरकार से बात कर रही है। इन राज्यों के हजारों बच्चे अभी भी देश की कोचिंग कैपिटल कोटा में फंसे हुए हैं। झारखंड के 3 हजार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के 2500-2500 हजार छात्र कोटा में मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही अपने राज्य के बच्चों को वापस ला चुकी है। इसके बाद हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और असम के बच्चे भी पिछले दो दिनों में अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो चुके हैं।  

बिहार के हजारों बच्चे हर साल मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा आते हैं। इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित होने के बाद से ये बच्चे कोटा में ही फंसे हुए हैं। बच्चों के अलावा उनके परिजन भी लगातार राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें कोटा से वापस लाने की व्यवस्था की जाए। जब इस गुहार का राज्य सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा तो ये बच्चे अपने-अपने हॉस्टलों में तख्तियां लेकर उपवास पर बैठ गए हैं। इन बच्चों का कहना है कि जब तक उन्हें घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होती है उनका उपवास जारी रहेगा।

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गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दूसरे राज्यों द्वारा बच्चों को कोटा से निकालने का लगातार विरोध कर रहे हैं। पिछले दिनों नीतीश ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोटा में पढ़ रहे वहां के बच्चों को बसों से उनके घर पहुंचाए जाने के फैसले का जमकर विरोध किया था और कहा था कि यह लॉकडाउन का उल्लंघन है। उन्होंने कहा था कि अगर बच्चों को वापस लाया जाएगा तो यह लॉकडाउन सफल नहीं होगा। नीतीश कुमार ने कहा है कि राजस्थान सरकार वहां रह रहे छात्रों को पूरी सुविधा दे।

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