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विश्व को Covid19 से बचाने रेत पर बनायीं माँ दुर्गा की अद्भुत आकृति बनी आकर्षण का केंद्र

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मोतिहारी: पूर्वी चंपारण जिले के सिकरहना अनुमंडल में बने एक पूजा पंडाल परिसर में रविवार को विश्वविख्यात सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र कुमार ने विजयादशमी के दिन रेत पर माँ की विकराल आकृति उकेरी। कलाकार ने महिसासुर रूपी कोरोना को भस्म करने के लिए माँ दुर्गा से गुहार भी लगायी। कलाकार ने अपने कलाकृति के माध्यम से लोगों से कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए दुर्गा पूजा मनाने की सलाह दी हैं। विश्व को कोरोना से बचाने के लिए रेत पर उकेरी गयी माँ दुर्गा का अद्भुत तस्वीर आकर्षण का केंद्र बनी हुयीं हैं। इसे देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ उमड़ रहीं हैं। पूजा देखने वाले श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन में एक सेल्फी भी ले रहें हैं। और कलाकार को धन्यवाद दे रहें हैं।

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सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने बताया कि नवरात्रि के समय में ही दुर्गा पूजा का उत्सव भी मनाया जाता है। बंगाल, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा का प्रारंभ हो गया है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के समय में ही दुर्गा पूजा का उत्सव भी मनाया जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से दुर्गा पूजा का शुभारंभ होता है और दशमी के दिन समापन होता है। शारदीय नवरात्रि की षष्ठी से दुर्गा पूजा का आगाज होता है। दुर्गा पूजा 5 दिन षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी तक मनाया जाता है।

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बता दें कि दुर्गा पूजा खासतौर पर बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य भागों में मनाया जाता है। नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के ही नवस्वरुपों की पूजा की जाती है। उसी में षष्ठी तिथि से दुर्गा पूजा के प्रारंभ से मां दुर्गा के साथ माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा के प्रथम दिन मां की मूर्ति स्थापित की जाती है, प्राण प्रतिष्ठा होती है और 5वें दिन उनका विसर्जन किया जाता है।

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