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बिहार में चुनाव बाद इन फॉर्मुलों पर बन सकती है सरकार

2nd Phase of Bihar Polls : 17 ज़िलों की 94 सीटों पर इतने करोड़ लोग करेंगे वोटिंग
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बिहार में पहले चरण का मतदान हो चुका है। दूसरे चरण के लिए 3 नवंबर को मतदान होगा, तीसरे चरण का मतदान 7 नवंबर को होगा और 10 तारीख को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। दिवाली तक राज्य को नई सरकार मिल जाएगी। अब तक हुए मतदान और रैलियों में जनसमर्थ पर नज़र डालें तो यह पता लगता है कि चुनाव एकतरफा बिल्कुल नहीं है। चिराग पासवान की पार्टी द्वारा एनडीए से अलग होकर नीतीश कुमार के खिलाफ अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने के बाद लड़ाई दिलचस्प हो गई है।

अगर चिराग पासवान का दांव सफल हो जाता है चुनाव बाद राज्य में तीन समीकरणों पर सरकार बनने की संभावना बन जाएगी। जिन पर नज़र डालना ज़रुरी है।

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सबसे अधिक संभावना- नीतीश के नेतृत्व में एनडीए की सरकार

तमाम ओपीनियन पोल की माने तो राज्य में नीतीश की सरकार बने रहने की संभावना सबसे अधिक है। नीतीश मुख्यमंत्री होंगे और बीजेपी का समर्थन रहेगा। यह तब होगा जब जेडीयू और बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल कर लें। अगर जेडीयू की सीटें कम भी हुई तो भाजपा ने तय किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश ही रहेंगे। लेकिन अगर जेडीयू बुरी तरह परास्त हुई और एलजेपी की सीटें ज्यादा आई तो पासा पूरी तरह पलट जाएगा।

एलजेपी-बीजेपी की साझा सरकार

एलजेपी 140 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। चिराग पासवान ने बीजेपी समर्थकों से अपील की है कि जहां जेडीयू के उम्मीदवार है वहां एलजेपी को वोट करें ऐसे में नीतीश कुमार के खिलाफ जो गुस्सा है उसका फायदा एलजेपी को मिल जाएगा और एलजेपी जेडीयू से ज्यादा सीट ले आएगी। ऐसी स्थिति में बीजेपी राज्य में सरकार बना पाएगी बिना नीतीश कुमार के। इसके लिए भाजपा को 100 से उपर सीटें लानी होगी और एलजेपी को कम से कम 30 सीटें लानी होगी।

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राजद और एलजेपी की सरकार

चुनाव बाद अगर राजद का पलड़ा बीजेपी से ज्यादा भारी रहा और एलजेपी 30 सीटें लाने में सफल रही तो एलजेपी राजद के साथ भी जा सकती है। अब तक के चुनावी प्रचार में तेजस्वी और चिराग एक दूसरे की तारीफ करते भी नज़र आए हैं।

राजद और जेडीयू की सरकार

माना जा रहा है कि हंग एसेंबली की स्थिति में अगर बीजेपी ने नीतीश को दरकिनार कर एलजेपी के साथ जोड़-तोड़ की तो नीतीश दोबारा पाला बदलकर राजद के साथ जा सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ हंग एसेंबली की स्थिति में ही हो सकता है।

बिहार की राजनीति को समझना इतान आसान नहीं है। अगर जनता खंडित जनादेश देगी तो कई संभवनाओं पर राज्य में काम शुरु हो जाएगा।

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