जीतन राम मांझी

बिहार चुनाव : जीतन राम मांझी ने दर्ज की जीत, देखें उनसे जुड़ी दस महत्वपूर्ण बातें

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बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के रुझानों में NDA को बहुमत मिलता दिख रहा हो मगर जीत-हार का पेंच अभी भी फंसा दिख रहा है। वहीं बिहार में गया के इमामगंज सीट पर पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने जीत दर्ज कर ली है। शुरुआती रुझानों में वो पीछे थे लेकिन बाद में उन्होंने बाजी मार ली है। मांझी पिछले चुनाव में अपनी पार्टी से सीट जीतने वाले एकमात्र व्यक्ति थे। नीतिश कुमार की वापसी के लिए रास्ता बनाने के लिए मजबूर होने के बाद मांझी ने 2015 में जेडी (यू) छोड़ दिया था।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, जीतन राम मांझी का प्रदेश में सियासी कद पिछड़े जाती व वर्गो में हमेशा बुलंदी पे रहा है ।  मांझी वर्ष 1980 से ही बिहार विधान सभा के निर्वाचित सदस्य है और 6 मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल के हिस्सा भी रह चुके है ।

  • कई राजनैतिक दलों का हिस्सा रह चुके है : मांझी अपने चालीस साल से भी लंबे राजनैतिक सफर में कई प्रमुख पार्टियों का हिस्सा रह चुके है : 1980-90 तक कांग्रेस में , 1990-96 तक जनता दल में , 1996-2005  तक राष्ट्रीय जनता दल में, 2005-2015 तक जदयू में ।
  • देश की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा से नवाज़े गए : 2015 में हुए राज्य के राजनैतिक उथल-फुथल के बाद जब इन्हें जदयू से निकाला गया, तब इन्होंने अपनी खुद की नई पार्टी का गठन किया ( हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ) जिसके के बाद इन्हें ग्रह मंत्रालय ने “जेड + ” सिक्योरिटी प्रदान की थी ।
  • नाबालिग उम्र में हुआ था विवाह : महज़ ग्यारह वर्ष की उम्र में ही जीतन मांझी की शादी शांति देवी से हो गयी थी, उनके दो बेटे और पांच बेटियां है ।
  • नीतीश कुमार की सरकार को बढ़त दिलाने में हाथ : निम्न जीवन स्तरों का पालन करने के लिए जाने जाने वाले मांझी का नीतीश कुमार का “महादलितों” का पहुचाने में बहुत बाद हाथ माना जाता है ।
  • टैलीफोन एक्सचेंज में भी किया है काम : सियासत में आने से पहले अपने घर का पालन पोषण करने हेतु मांझी ने लगभग 13 साल तक पोस्ट्स एंड टेलीग्राफ विभाग में क्लर्क का काम भी किया, कांग्रेस से 1980 में टिकट मिल जाने के बाद ही इन्होंने वहां अपना त्यागपत्र दिया ।
  • दलितों तक सरकारी आवाज़ पहुचाने में बड़ा योगदान : महादलितों के बीच में रेडियो का प्रचलन बढ़ाने में मांझी का बहुत बाद योगदान रहा है, इससे सभी पिछड़े व गरीब जन तक सरकारी नीतियों और आवाज़ को पहुचाने में बहुत राहत मिली ।
  • घोटालो में भी आया है नाम : 2005 के चुनाव में जदयू की तरफ से बाराचट्टी सीट से चुनाव जीतने के बाद ही इनका नाम फ़र्ज़ी बी.एड डिग्री दिए जाने वाले रैकेट में आ गया चूंकि ये 1990 के दशक में बिहार के शिक्षा मंत्री हुआ करते थे ।  इनके ऊपर फ़र्ज़ी डिग्री कोर्स चलाने का भी आरोप आया । हालांकि ये बाद में बरी भी हो गए ।
  • कई बयानों की वजह से सुर्खियों में आते रहते है : 2008 में जब बिहार में भूखमरी की आपदा आयी थी, तब इन्होंने यह तक कह दिया था की लोगो को चूहे खाना शुरू कर देना चाहिए । दरअसल मांझी मुसहर जाती से है, जहा चूहा खाना एक आम बात है ।
  • वामपंथी दल से भी जुड़े रहे : यूं तो अपने लंबे राजनैतिक सफर में मांझी ने कई पार्टियां बदली है पर उनमे सबसे  रोचक ये भी है की वह छात्र दिनों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के भी सदस्य थे ।
  • तीन अलग चुनाव – तीन अलग निर्वाचन छेत्र : मांझी के पास एक दुर्लभ उपाधि ये भी है की वह लगातार तीन चुनाव में अलग अलग सीट से विजयी रहे है – बाराचट्टी , बोध गया , मखदुमपुर में ।

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