Bihar election : सैलाब में डूब चुके बिहार को मिलेगा 625 करोड़ का चुनावी कफ़न

Bihar election : सैलाब में डूब चुके बिहार को मिलेगा 625 करोड़ का ‘चुनावी कफ़न’

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कोराना महामारी और बाढ़ से तबाह-ओ-बर्बाद हो चुके बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar election) किस तरह होगा, इसके लिए चुनाव आयोग ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिया है। चुनाव आयोग ने बीते शुक्रवार, 21 अगस्त को गाइडलाइंस जारी करते हुए संकेत दिया कि बिहार में तय समय पर ही विधानसभा चुनाव होंगे।

देश के सबसे ग़रीब राज्यों में गिना जाने वाला बिहार आज दोहरी मार झेल रहा है। एक जानिब से कोरोना ने लाचार बना कर घर में क़ैद किया तो दूसरी जानिब से बाढ़ के कारण आए सैलाब ने उसी घर को बहा दिया। पानी के इस सैलाब में किसी का घर बहा तो किसी की ज़िंन्दगी भर की मेहनत।

किसी की उम्मीद बह गई तो किसी के सपने। किसी मां बह गई तो किसी का बाप। न जाने क्या-क्या इस बाढ़ में बह गया। बिहार की तबाही के इस मंज़र पर मुमकिन नहीं की सब लिखा जा सके। कुछ लम्हों के लिए गर आप बिहार में आए सैलाब के मंज़र को तसव्वुर (Imagin) करेंगे तो आप बिहार के लोगों का दर्द महसूस कर पाएंगे।

बाढ़ से 16 ज़िलों में 81.79 लाख प्रभावित, अब तक 27 की गई जान

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, बिहार की प्रमुख नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। दरभंगा ज़िले में सबसे अधिक 15 प्रखंडों के 227 पंचायतों की 20.61 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है। आइये अब आपको बिहार में बाढ़ के कारण जारी तबाही से जुड़ी कुछ वे जानकारियां बताई जाएं जो आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी की गई हैं। 

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, बाढ़ से दरभंगा ज़िले में सबसे अधिक 11 लोगों की जान गई है। वहीं अन्य ज़िले, मुजफ्फरपुर में छह, पश्चिम चंपारण में चार तथा खगड़िया, सारण एवं सीवान में दो-दो व्यक्ति और 86 मवेशियों की अब तक मौत हो चुकी है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव एम. रामचंद्रुडू ने बताया कि कुल छह राहत केंद्रों में से पांच केंद्र समस्तीपुर में और एक खगड़िया में चल रहा है। कुल 5,186 लोग राहत केंद्रों में रह रहे हैं। वहीं बाढ़ के कारण विस्थापित लोगों को भोजन कराने के लिए 443 सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की गई है, जहां 325,610 लोगों को भोजन कराया गया एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 26 टीमे लगातार राहत-बचाओ के काम में जुटी हुईं हैं।

बिहार की कुल 75 लाख से ज़्यादा बाढ़ प्रभावित जनसंख्या में अकेले दरभंगा ज़िले की 20 लाख से ज़्यादा की आबादी है। इसके बाद मुजफ्फरपुर की 14 लाख और पूर्वी चंपारण की 10 लाख से ज़्यादा की आबादी प्रभावित है। दरभंगा ज़िले के 18 ब्लॉक में से दरभंगा सदर, बहादुरपुर, हायाघाट, केवटी, बहेड़ी समेत 15 ब्लॉक बाढ़ प्रभावित है।

वहीं कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया है कि,

“अभी तक विभाग का अनुमान है कि 8 लाख हेक्टेयर खेती की ज़मीन में पानी घुसा है। लेकिन इसके चलते फसल का कितना नुक़सान हुआ, इसका आंकड़ा पानी निकलने के बाद ही पता चलेगा।”

डूबते हुए प्रदेश में चुनाव इतना ज़रूरी क्यों ?

अब सवाल ये है कि जो प्रदेश सैलाब में डूब चुका हो। कोरोना महामारी ने जिस राज्य को बेरोज़गारी और भुखमरी का अंधा कुआं बना दिया हो, पानी में जहां लाशें तैर रही हों। सैकड़ों घर काग़ज की तरह बह गए हों, उस प्रदेश में चुनाव (Bihar election ) करान इतना अहम क्यों ?

इस महामारी के बीच चुनाव किस तरह होंगे और नामांकन से लेकर वोटिंग के दिन तक सोशल डिस्टेसिंग का पालन किस तरह होगा, इसके लिए चुनाव आयोग ने विस्तृत दिशानिर्देश भी  जारी कर दिया है। चुनाव आयोग ने गाइडलाइंस जारी करते हुए संकेत दिया कि बिहार में तय समय पर ही विधानसभा चुनाव होंगे।

इन गाइडलाइन के तहत चुनाव आयोग ने बताया है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election ) के लिए नामांकन ऑनलाइन दाख़िल किए जाएंगे। साथ ही चुनाव के दौरान कोरोना से बचाव के लिए कई नियमों का पालन भी करना होगा।

वहीं चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक डोर टू डोर कैंपेनिंग के लिए उम्मीदवार के साथ ज्यादा से ज्यादा पांच लोग साथ हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि गृह मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक ही सार्वजनिक सभाएं और रोड शो की अनुमति होगी।

चुनाव आयोग के अनुसार इस तरह होंगे चुनाव

वोटिंग से पहले दस्ताने दिए जाएंगे वोटर को। हर बूथ पर अधिकतम एक हजार वोटर ही होंगे। बूथ पर सैनिटाइजर होगा। इसे चुनाव से 72 घंटे पहले लगातार सैनिटाइज किया जाएगा। साथ ही पब्लिक रैली करने के लिए सोशल डिस्टेसिंग के साथ होगी। कितने लोग आएंगे इसकी जानकारी भी पूर्व तय होगी। इसमें निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी रहेंगे।

ऑनलाइन नॉमिनेशन होगा। जमानत राशि भी ऑनलाइन जमा कर सकते है। हालांकि सशरीर नामांकन का भी विकल्प होगा। लेकिन इसके लिए मात्र 2 लोग साथ जा सकेंगे। अधिकतम दो गाड़ी ले जा सकते हैं साथ। होम मिनिस्ट्री कोविडी सुरक्षा से जुड़े मानक को पूरा करने पर रैली या रोड शो जैसे आयोजन को अनुमति देगी।जन-संपर्क अभियान में घर-घर अधिकतम पांच लोगों को अनुमति होगी।

गाइडलाइन में कहा गया है कि फेस मास्क, सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनर, ग्लव्स, पीपीई किट्स का इस्तेमाल चुनाव प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भी पालन किया जाएगा।

 बिहार चुनाव पर राज्य 625 करोड़ करेगा ख़र्च

हिंदुस्तान की एक ख़बर के मुताबिक, राज्य इसके लिए अनुमानित 625 करोड़ रुपये का खर्च करेगा। ये 2015 में अंतिम राज्य के चुनावों को आयोजित करने के लिए खर्च की गई राशि के दोगुने से अधिक है। कुल राशि का पांचवां हिस्सा मतदाताओं और मतदान कर्मियों के लिए बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए खर्च करने का अनुमान है।

2015 के चुनावों की तुलना में, जब चुनाव पर लगभग 270 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, इस वर्ष के चुनावों के खर्च में 131.48% की अनुमानित वृद्धि होगी। महामारी इसका बड़ा कारण है। राज्य सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनावों का खर्च 535 करोड़ रुपये था। जबकि लोकसभा चुनाव कराने का खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है, संबंधित राज्य विधानसभा चुनाव (Bihar election ) कराने के लिए विधेयक तैयार करते हैं।

 मुश्किल समय में इतना पैसा खर्च करना कितना उचित ?

एक तरफ़ राज्य में आई बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर रखा है। लोग भूख-प्यास से मर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ़ उस राज्य में कोरोना के साथ-साथ अन्य बीमारियों के फैलने का संकट भी बना हुआ है। बेरोज़गारी, भुखमरी, लाचारी जैसे माहौल में चुनाव कराना ज़ख्म पर नमक छिड़कने जैसा है।

जब लोगों को राशन की ज़रूरत है तब सरकार उन्हें चुनावी भाषण देने की तैयारी में है। जब लोगों को उनके बह चुके घर को दोबारा बनाने के लिए पैसे की ज़रूरत है, तब सरकार उन्हें चुनावी पंडाल दे रही है। जब राज्य के नौ जवानों को रोज़गार की ज़रूरत है, तब सरकार चुनावी नारों को ही रोज़गार बता रही है।

क्या बिहार की जनता इस मुश्किल समय में चुनाव चाहती है ? क्या चुनाव में करोड़ों खर्च करने वाली पार्टियां, बिहार में बाढ़ पीड़ितों को वो पैसा दे सकती हैं, जो वे चुनाव लड़ने में उड़ाएंगी? ये एक कठिन समय है। बिहार में इस वक्त चुनाव (Bihar election) कराना चिता पर रोटी सेकने जैसा है।

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