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MSP पर नीतीश सरकार की बेशर्मी देखिए, बिहार सरकार को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए

Bihar CM Nitish Kumar shamelessness on MSP, Bihar government should die drowned in water, see food corporation report
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) भले ही अपने आपको किसान (Farmers) हितैशी बता रहे हों लेकिन एक रिपोर्ट ने कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। पत्रकार अभिनव गोयल (Journalist Abhinav Goel) ने किसानों और एमएसपी (MSP) से जुड़ी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Food Corporation of India) की एक रिपोर्ट साझा की है जिसमें कई चौकाने वाले तथ्य हैं। इस तथ्य आधारित रिपोर्ट को उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया है, आप भी देखिए, समझिए और आस-पास के लोगों को भी समझाइये… नीचे की रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ें- ये फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की नंवबर 2020 महीने की सेल रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि बिहार में नवंबर महीने में कितना चावल बांटा गया। ये सरकारी खपत का आंकड़ा है। (MSP Bihar Nitish Kumar)

डिफ़ेंस में चावल की खपत – 103.62 टन
मिड डे मिल प्राइमरी में खपत- 18261.4
मिड डे मिल प्राइमरी से ऊपर में खपत- 17990.1 टन
राशन कार्ड पर बंटने वाले चावल की खपत- 381400.28 टन
कुल बिहार में खपत- 417755.4 टन ( चार लाख 17 हज़ार 755 टन की खपत )
सिर्फ एक महीने में अगर चार लाख टन से ज्यादा की खपत है तो साल की खपत का अंदाजा लगाइये।

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गौर करने वाली बात-
ये जितना भी चावल कि बिहार में खपत हो रही है वो सब MSP पर खरीदी गई धान से कूटा हुआ चावल है। और एक किलो चावल को संभालने में जो खर्चा है वो अलग। अब कुछ सवाल खुद से और नीतीश सरकार से करिए। ये चावल कहां से आ रहा है? क्या ये चावल बिहार के किसानों ने जो धान लगाई थी वही घूम कर उन्हें मिल रहा है? या दूसरे राज्यों से MSP पर खरीदी गई धान से निकला चावल बिहार में आ रहा है।

MSP का गणित-
नीतीश जी ने अपने किसानों से MSP पर साल 2019 में करीब 13 लाख टन चावल की MSP पर खरीद की। यानि करीब 20 लाख टन धान। मतलब बिहार में तीन महीने खपत लायक चावल अपने किसानों से खरीदा। इस खरीद से उन किसानों को MSP का लाभ मिला। दूसरे किसान जिनकी धान को बहुत आसानी से बिहार सरकार खरीद सकती थी जबकि जरूरत बहुतायत में है। (MSP Bihar Nitish Kumar)

MSP का झुनझुना और डीज़ल की आड़ में बड़ा धोखा !

लेकिन नहीं.. सरकार बेशर्म है-
लेकिन नहीं.. सरकार बेशर्म है। मंडी व्यवस्था खत्म कर दी। हाल ये कि किसानों को 1868 रुपये MSP वाली धान 1200 रुपये में बेचनी पड रही है। इस रिपोर्ट के पर्चे छपवाकर गांव गांव बांटने चाहिए और किसानों को इस बारे में बताना चाहिए कि उनकी सरकारें उनके साथ कितना बड़ा धोखा कर रही हैं। बिहार सरकार डिसेंट्रलाइज प्रॉक्योरमेंट के जरिेए बहुत आसानी से अपने किसानों को करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचा सकती है। जिसकी सब्सिडी केंद्र सरकार देने को तैयार है। (MSP Bihar Nitish Kumar)

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