भोपाल: लॉकडाउन में हो रहा गरीबों पर अत्याचार

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देश के कई हिस्सों में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के चलते दोबारा लॉकडाउन लगाया गया है। कहीं हफ्ते में 2 दिन का लॉकडाउन होता है तो कहीं पूरे हफ्ते का। इस लॉकडाउन और अनलॉक के खेल से कोरोनावायर से राहत मिलेगी या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन रोज़ कमाने खाने वाले दिहाड़ी मज़दूर और रेहड़ी पटरी वालों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया है। भोपाल में 10 दिन का लॉकडाउन लगाया गया है। इस दौरान केवल ज़रुरी चीज़ों की दुकाने ही खोली जा सकती हैं। जब लॉकडाउन शहर में लागू हुआ तो पुलिसिया कार्रवाई का शिकार एक गरीब बुज़ुर्ग फल वाला हो गया।

मेवाराम बरैया जिनकी उम्र 60 साल है, वह भोपाल के कोलार में ओम नगर इलाके में रहते है। वह शुरु से आम का ठेला लगाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान फ्रूट कारोबारी के रुप में ज़्यादा है। सीजन के अनुसार माल बेचने का काम करते हैं। 24 जुलाई की रात 8 बजे शहर में लॉकडाउन लगाया गया। मेवाराम ठेला लेकर घर की तरफ जाने लगे। तभी पीछे से पुलिस की डायल-100 आई और उन्होंने मेवाराम बरैया पर डंडे बरसाना शुरु कर दिया। इस पिटाई से मेवाराम का बायां हाथ टूट गया। मेवाराम अब हाथ टूटने की वजह से खाने-पीने के भी मोहताज हो गए हैं।

पुलिस ने मामले को दबाया
पुलिस ने इस पूरे मामले को रफा दफा कर दिया है। मेवाराम बरैया ने बताया कि उसके साथ हुई घटना के सारे दस्तावेज पुलिस के पास है। मेडिकल और एक्सरे भी उन्होंने ही रख लिए। मेरे पास कुछ भी नहीं है। अब मैं किस जगह जाकर इलाज करूं। मारपीट की जांच कोलार थाने के एसआई एबी मर्सकोले कर रहे हैं।

भोपाल में कई मामले हुए है
लॉकडाउन में यातना का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जहांगीराबाद में संदीप गिरी के परिवार पर यह आफत आई थी। संदीप दवा लेने गया था जिसको पुलिस ने बेरहमी से पीटा था। संदीप की मां होमगार्ड सैनिक भी है। संदीप और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस से मारपीट करने का भी मुकदमा दर्ज हुआ था। हाल ही में इंदौर में भी एक वीडियों वायरल हुआ था जिसमें प्रशासन ने एक अंडे वाले का ठेला पलट दिया था।

पुलिस प्रशासन की सख्ती सबसे अधिक गरीब रेहड़ी पटरी वालों पर ही देखने को मिलती है। मेहनत से अपने परिवार का पेट पालने वाले इन गरीबों के बारे में न प्रशासन सोचता है न सरकार। अगर यह गरीब एक दिन न कमाएं तो इनके घर में शाम को चूल्हा नहीं जलता। पहले सरकार लापरवाही से महामारी को फैलने देती है, फिर जब स्थिति हाथ से निकलने लगती है तो यह जताने के लिए की सरकार कुछ कर रही है, शहरों को लॉकडाउन के हवाले कर दिया जाता है। क्योंकि प्रशासन के पास डंडा है और डंडे से अस्पतालों में व्यवस्था नहीं सुधरती लेकिन डंडों से डराकर लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

Written by Suyash Bhatt, He is a journalist based in Bhopal Madhya Pradesh.

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