भीमा कोरेगांव हिंसा

भीमा कोरेगांव हिंसा : वॉशिंगटन पोस्ट की ख़बर के बाद क्यों मचा है बवाल, पढ़ें पूरा मामला..

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भीमा कोरेगांव हिंसा : महाराष्ट्र के पुणे में भीमा कोरोगांव में 2018 में हुई हिंसा के सिलसिले में हुई जाँच और गिरफ़्तारियाँ एक नई रिपोर्ट के आने के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में है।

भीमा कोरेगांव हिंसा और अर्बन नक्सल मामले में नया खुलासा हुआ है। आरोपियों के वकील ने दावा किया है कि आरोपियों में से एक रोना विल्सन (Rona Wilson) के लैपटॉप से बरामद साजिश के मेल खुद उन्होंने नहीं लिखे थे बल्कि इन्‍हें प्लांट करवाया गया था।

अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अमेरिका की एक साइबर फ़ोरेंसिक लैब की जाँच रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि इस मामले में गिरफ़्तार किए गए कम-से-कम एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ सबू त प्लांट किए गए थे।

क्या है पूरा मामला

पुणे में हुई हिंसा के मामले में कई वामपंथी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ़्तार किया गया है। भीमा कोरेगांव में अंग्रेज़ों की महार रेजीमेंट और पेशवा की सेना के बीच हुई लड़ाई में महार रेजीमेंट की जीत हुई थी। दलित बहुल सेना की जीत की 200वीं वर्षगांठ के मौक़े पर हिंसा की घटना हुई थी।

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इस वर्षगांठ के कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले संगठन एल्गार परिषद के कई सदस्यों और जाने-माने दलित अधिकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अलग-अलग समय पर देश के अलग-अलग कोनों से गिरफ़्तार किया गया है और उन पर ‘प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश’ और ‘देश की एकता और अखंडता को तोड़ने की कोशिश करने’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, और वे सभी जेल में हैं।

मामले में आया नया मोड़ क्या

अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों के खिलाफ सूबतों को मालवेयर के सहारे लैपटॉप में प्लांट किया गया था। बाद में यही लैपटॉप पुलिस ने सीज कर लिए।

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आर्सेनल कंसल्टिंग अमेरिका की डिजिटल फॉरेंसिक पर काम करने वाली कंपनी है। इस फर्म ने अपनी जांच में पाया है कि एक्टिविस्ट रोना विल्सन की गिरफ्तारी के पहले ही अटैकर्स ने उनके लैपटॉप में मालवेयर के जरिए छेड़छाड़ की और कम से कम 10 डॉक्यूमेंट हिडेन फाइल बनाकर सेव कर दिए।

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इसके बाद पुलिस ने जब ये लैपटॉप सीज किया तो इसमें मिलने वाले इन डॉक्यूमेंट को भीमा कोरेगांव केस में चार्जशीट के प्राथमिक सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

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