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पंकज कपूर की वो पांच फिल्में, जिसे देखने के बाद आप इस एक्टर की एक्टिंग के मुरीद हो जाएंगे

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1 . एक डॉक्टर की मौत1991

जो शख्स कड़ी मेहनत और संसाधनों की कमी से नहीं हारा, वो लालफीताशाही और कुछ सूट-बूट वाले मूर्खों की हठधर्मी से नहीं जीत पाया। कुष्ठरोग की दवाई ढूंढने में अपनी तमाम ज़िंदगी दी इस वैज्ञानिक ने। और जब कामयाबी मिली तो एहसासे-कमतरी की मारी भारतीय अफसरशाही ये मानने को तैयार ही नहीं हुई कि विदेशी वैज्ञानिकों से पहले किसी भारतीय ने ये काम कर दिखाया है। फिल्म का ये डॉयलाग आपको फिल्म की ताक़त का एहसास करा देगा । “इसका मतलब आप लोग मुझे यहीं ख़त्म कर देना चाहते हैं। मैं स्वीकार करता हूं मैंने कोई वैक्सीन नहीं बनाया। आई सरेंडर ।”

2 . धर्म-2007

फिल्म की कहानी काफी प्रभावी ढंग से सोची गयी है | कलाकारों में पंकज कपूर और पंकज त्रिपाठी जैसे नामी कलाकारों को लिया गया है | फिल्म में धार्मिकता की आड़ में लोगों की बेवजह की मानसिकता; जोकि मानवता के कार्यों पर भी भारी पड जाती है को भी दिखाया गया है |पंकज इस फिल्म में सिर्फ और सिर्फ ‘पंडित राम नारायण चतुर्वेदी’ लगे हैं और कुछ नहीं। चतुर्वेदी जी एक कट्टर हिंदू ब्राह्मण हैं। शास्त्रों के ज्ञाता हैं। जैसा धर्म उन्होंने घोट रखा है, वैसा ही जीते आए हैं। इसीलिए जब कोई अछूत छू जाता है तो उसे पीटते तो नहीं, लेकिन दोबारा स्नान ज़रूर करते हैं। पूरी कहानी के लिए इस फिल्म का देखना ज़रूरी है ।

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3 . एक रुका हुआ फैसला-1986

एक लड़के पर अपने बाप के क़त्ल का इल्ज़ाम है । 12 ज्यूरी मेम्बर्स को फैसला करना है कि लड़का दोषी है या नहीं. 11 लोग उसे दोषी मानते हैं। सिर्फ 1 आदमी है जो इतनी जल्दी फैसला देने को राज़ी नहीं. धीरे-धीरे वो अकेला शख्स अपने तर्कों से बाकियों को कायल करने लगता है। इस तमाम वक्फे में छोटे से कद का एक आदमी लड़के को निर्दोष मानने वाले हर एक बंदे के साथ पर्सनल दुश्मन जैसा व्यवहार करता है। यही आदमी है पंकज कपूर। बाक़ी की कहानी के लिए आपको फिल्म देखना होगा।

4 . मक़बूल-2003

यह फिल्म पैसे, प्यार और पावर की कहानी है। मक़बूल अपने मास्टर के साथ रहता है और एक लड़की से प्यार करता है। मक़बूल को अब अपने मास्टर और प्यार में से किसी एक को चुनना है। मकबुल अपने प्यार को चुनता है। उसका मास्टर उससे नाराज़ हो जाता है। क्या मक़बूल को अपने मास्टर के गुस्से का सामना करना पड़ेगा?

5 . रुई का बोझ-1997

पंकज कपूर की ये फिल्म चर्चा में नहीं रही मगर परदे की दुनिया में हमारे समाज और परिवार के उतार-चढ़ाव का सटीक और बेहद ही चित्रण है। पंकज कपूर ने किशुन के किरदार में एक मजबूर बुज़ुर्ग की पीड़ा को पूरे मर्म से निभाया। जब आप फिल्म को बाप एवं बेटे दोनों के नज़रिए से देखेंगे तो किशुनशाह जैसे बेशुमार बुज़ुर्गों की पीड़ा समझ आएगी। आप को मां-बाप को पहुंचाई मामूली दिखने वाली ठेसों का खयाल आएगा।

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