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जंगल में लगी आग कभी-कभी फायदेमंद क्यों होती है ?

जंगल में लगी आग कभी-कभी फायदेमंद क्यों होती है ?

जंगल में आग लगने की घटनाओं को आपने देखा और सुना ही होगा। जंगह की आग को काबू में करना बेहद मुश्किल काम है। एक बार अगर आग ने जंगल को अपनी चपेट में ले लिया तो बड़ी मशक्कत के बाद ही उस आग को बुझाया जा पाता है। फॉरेस्ट फायर्स को अनियंत्रित आग माना जाता है। अक्सर जंगलों, घास के मैदानों, ब्रशलैंड और टुंड्रा प्रदेश के पेड़-पौधे आग की चपेट में आ जाते हैं।

जंगल की आग को लेकर 2022 की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा यह बताया गया कि मानवीय लापरवाही और बिजली गिरने से अक्सर जंगल में आग की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन खराब वन प्रबंधन की नीति, जलवायु परिवर्तन, भूमि के उपयोग में बदलाव की वजह से आग पहले से कहीं अधिक लंबे समय तक जंगल में लगी रहती है।

जंगलों में आग लगने से बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है लेकिन सभी तरह के जंगलों में लगने वाली आग हमेशा सिर्फ नुकसानदेह नहीं होती है। भारत में विभिन्न प्रकार के वन पाए जाते हैं। इनमें से प्रत्येक में आग का प्रभाव अलग-अलग होता है। जंगल की आग सदाबहार वनों के लिए खास तौर पर ख़तरनाक है।

जंगल में लगने वाली आग के फायदे ?

प्रोफेसर भरत सुंदरम पर्यावरण अध्ययन के सहायक प्रोफेसर हैं। वो भारत के क्रेआ विश्वविद्यालय में पर्यावरण से जुड़े मामलों पर शोध करते हैं। प्रोफेसर भरत कहते हैं कि जंगल में लगने वाली हर तरह की आग सिर्फ नुकसान नहीं पहुंचाती है।

कुरुबा और सोलिगास समुदाए के लोगों ने जंगल की आग के नियंत्रण और संतुलन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया है। इन समुदायों द्वारा लगाई गई आग के ज़रिए हेमीपैरासाइट (परजीवी) को कम कर दिया और संभवतः टीक-जनित रोगों की घटनाओं को कम कर दिया, जबकि चारे के रूप में काम आने वाली घास को विकसित किया।

ये जनजातियों के लोगों ने जंगल की आग से घास की उपज में बढ़ोतरी की और पेड़ों की वृद्धि को कम किया। आगजनी के कारण विकसित घास में ही कई तरह की स्थानीय जंगली जड़ी-बूटियां भी विकसित हुई। इससे न केवल लकड़ी बल्कि अन्य वन उत्पादों को इकट्ठा करने के लिए बेहतर देखरेख और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हुई। साथ ही इससे इन लोगों को अपने चरागाहों को बनाए रखने में मदद मिली।

जंगल में आग कैसे लगती है?

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (World Wide Fund for Nature)  2020 की रिपोर्ट बताती है कि जंगल में प्राकृतिक रूप से बिजली गिरने, ज्वालामुखी और कोयले के जलने की वजह से जंगल में आग लग सकती है लेकिन ऐसा अपेक्षाकृत बहुत कम होता हैं। लेकिन जंगल में लगने वाली सभी तरह की आग में से 75% आग के लिए इंसान ज़िम्मेदार हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के जंगलों में लगने वाली आग के लिय इंसान ज़िम्मेदार है। 95 प्रतिशत से अधिक आग इंसानी लापरवाही के कारण ही लगती है।अक्सर मानवीय लापरवाही के चलते मसलन माचिस की फेंकी गई तीली या सुलगते सिगरेट की चिंगारी आदि के कारण आग अनियंत्रित हो जाती है।

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