बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की बर्फ पिघलने लगी है

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इस साल फरवरी में इमरान सिद्दकी को राजदूत नियुक्त किए जाने के बाद इस्लामाबाद ने ढाका के साथ दोस्ती बढ़ाने की पहल की। सिद्दकी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन से मुलाकात की थी। पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हसीना से कोविड-19 पर बातचीत के अलावा इमरान खान ने बांग्लादेश के साथ बेहतर रिश्तों की अपील की है। इमरान खान ने पाकिस्तान के बांग्लादेश के साथ बेहतर रिश्तों के महत्व पर बात की। उन्होंने सार्क के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। यह 1971 के बाद पहली बार है जब पाकिस्तान और बांग्लादेश के दर्मियां इतनी गर्मजोशी से बात हुई है। अगर देखा जाए तो यह एक अच्छी पहल है आखिर कब तक इतिहास की कड़वाहट भविष्य की संभावनाओं को खत्म करती रहेंगी। जो होना था वह हो चुका। लेकिन भारत में इस खबर से थोड़ी बेचैनी बढ़ी है, आखिर ऐसा क्यों है?

दरअसल डॉन अखबार की यह खबर आज की सबसे चर्चित खबरों में से एक है। 1971 में पाकिस्तान से टूटकर जब बांग्लादेश बना तब से लेकर अब तक दोनों देशों के रिश्ते पर ऐसी बर्फ जमी जिसे ग्लोबल वॉरमिंग भी नहीं पिघला पाई। बीच-बीच में कोशिश ज़रुर हुई लेकिन शेख हसीना ने दोबारा सत्ता में लौटकर 1971 वॉर क्रिमिनल फाईल खोल दी जिससे दोनों देशों के बीच की खाई को और बढ़ गई। लेकिन अचानक जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बांग्लादेश की पीएम शेख हसीन को फोन मिलाकर उनका हालचाल जाना तो लगा मानो कुछ ऐतिहासिक घटित हुआ है। माना जा रहा है कि इस कोशिश के पीछे चीन का हाथ है। चीन एशियाई देशों को अपना उपनिवेश बनाना चाहता है। ऐसे में पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अहम साबित हो सकते हैं। भारतीय जानकार इसे चीन की चाल की तरह भी देखते हैं। चीन भारत को एशिया में घेरना चाहता है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और ईरान के रिश्ते चीन से बेहतर हुए हैं, वहीं भारत के साथ इन देशों के रिश्ते तल्ख होते दिखाई दे रहे हैं।

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डॉन अखबार की खबर के मुताबिक बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्तों में खटास का एक कारण भारत का नागरिकता संशोधन कानून भी रहा है। और पाकिस्तान-बांग्लादेश को साथ लाने में भी चीन का ही हाथ है।

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