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बल्लू दासवानी, जिन्होंने सिखाया कैसे खबरों का सूर्योदय रात में भी हो सकता है

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सीहोर शहर के जाने माने पत्रकार बल्लू दासवानी के आकास्मिक निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। उनकी पत्रकारिता हमेशा नवागत पत्रकारों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। ग्राउंड रिपोर्ट बल्लू दासवानी जैसे ज़मीनी पत्रकार को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

ग्राउंड रिपोर्ट | पल्लव जैन

सीहोर शहर के जाने माने पत्रकार चंद्रकांत दासवानी (बल्लू भैया) का आकस्मिक निधन हो गया। वे लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे। उनका दैनिक अखबार सीहोर एक्सप्रेस शहर के लिए खबरों का विश्वसनीय स्रोत रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

बल्लू दासवानी ने सीहोर शहर में पत्रकारिता को नया आयाम दिया। उन्होंने सबसे पहले डिजिटल क्रांति के साथ जुड़कर सीहोर एक्सप्रेस को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का काम किया। उनकी पत्रकारिता उत्कृष्ट मानकों और सिद्धांतों पर टिकी रही। ज़मीनी पत्रकारिता और आम आदमी की पत्रकारिता को उन्होंने हमेशा तरजीह दी। जब तमाम अखबार सनसनी और भ्रामक खबरों के माध्यम से ख्याति पाने की दौड़ में शामिल हो गए तब भी चंद्रकांत दासवानी गणेश शंकर विद्यार्थी और माखनलाल दादा की पत्रकारिता को बढ़ावा देते रहे। उनके अखबार का हर कोई इंतज़ार करता था।

खबरों का सूर्योदय अब रात को

व्हाट्सअप और फेसबुक के माध्यम से उन्होंने सीहोर एक्सप्रेस को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। शहर की सभी जरूरी खबरें अब सीहोर एक्सप्रेस के माध्यम से लोगों तक पहुंचने लगी थी। किसी को अब शहर की खबरे पढ़ने के लिए अगले दिन का इंतज़ार नहीं करना पड़ता था। उनके प्रयास से खबरों का सूर्योदय अब रात में ही होने लगा था।

चंद्रकांत दासवाणी ने पत्रकारिता को व्यापार नहीं बनने दिया। उन्होंने अथक प्रयास कर सामाजिक मुद्दों की पत्रकारिता को जीवित रखा। शहर के हर नवागत पत्रकार के लिए वे हमेशा प्रेरणा स्त्रोत बने रहेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि

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