बाल गंगाधर तिलक: स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है

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बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतंत्रता सेनानी थे. आज से 100 साल पहले 1 अगस्त, 1920 को मुंबई में बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु हुई थी. ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा’, अंग्रेजों के खिलाफ पहली बार संपूर्ण स्वराज की मांग करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ही थे.

मूंगफली के लिए छोड़ना पड़ा था स्कूल

इतिहास के पत्रों में उनका एक किस्सा काफी प्रचलित है. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक बचपन से ही सच्‍चाई पर अडिग रहते थे. वे खुद कठोर अनुशासन का पालन करते थे, लेकिन साथियों की अनुशासनहीनता की कभी चुगली नहीं करते थे. एक बार कक्षा से कुछ छात्रों ने मूंगफली की छिलके फर्श पर फेक दिए. अध्यापक कक्षा को गंदा देख बहुत नाराज हो गए. अध्यापक ने आकर पूछा कि यह किसने किया है तो कक्षा के किसी छात्र ने अपनी गलती नहीं मानी. अध्यापक ने पूरी क्लास को ही दंडित कर दिया.

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वे प्रत्येक छात्र के हाथों पर छड़ी से मारने लगे. जब बाल गंगाधर तिलक की बारी आई तो उन्होंने हाथ आगे नहीं बढ़ाया और कहा, मैंने मुगफली नहीं खाई है तो मैं बेंत भी नहीं खाऊंगा. इसपर अध्यापक ने कहा कि फिर बताओ यह किसने किया. तिलक ने जवाब दिया, न मैं किसी का नाम बताऊंगा और न ही बेंत खाऊंगा. इस बात पर अध्यापक ने उनकी शिकायत प्राचार्य से कर दी और उनके पिता को स्कूल आना पढ़ा. उनके पिता ने कहा कि तिलक के पास इतने पैसे ही नहीं है कि वे मूंगफली ला पाए. पिताजी के इस उत्तर के फलस्वरूप तिलक को स्कूल से निकाल दिया गया. उन्हें बिना किसी अपराध दंड पाना पसंद नहीं आया. उन्होने बचपन से ही सच्चाई का साथ देने की ठान ली थी.

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अपने लेखों की वजह से जाना पड़ा जेल

ब्रिटिश सरकार की नीतियों की आलोचना करने और भारतीयों को पूर्ण स्वराज देने की मांग के चलते उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा. एक लड़की की विवाह करने की आयु को 10 से 12 वर्ष कर दी गई. जिसके संधर्भ में उन्होंने अपने अखबार में लिखे गए एक लेख को देश का दुर्भाग्य बता कर छापा था और ब्रिटिश सरकार के निरंतर विरोध करने के जुर्म में 27 जुलाई, 1897 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बर्मा की जेल भेज दिया गया. इसी दौरान उनकी पत्नी का देहांत हो गया. वे अपनी पत्नी का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए. लोकमान्य तिलक ने जेल के कारावास के दौरान एक किताब भी लिखी.

आज से 100 साल पहले 1920 में हुई बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु

नये सुधारों को निर्णायक दिशा देने से पहले ही 1 अगस्त, 1920 को बम्बई में उनका निधन हो गया. उनके निधन पर शोक व्‍यक्‍त करते हुए महात्‍मा गांधी ने उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय क्रान्ति का जनक कहा था.

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ये लेख स्वाति गौतम ने लिखा है. स्वाति ग्राउंड रिपोर्ट में शिक्षा, राजनीति व किसानो से जुड़े मुद्दों पर लिखती हैं.

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