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जाने उस कविता के बारे में जिसे हमेशा अटल जी दोहराते थे…क्या हार में क्या जीत में

भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज देहवासन के बाद पहला जन्मदिन है। उनके चाहने वाले अपने अपने तरह से उन्हें श्रद्धांजली दे रहे हैं। आपको बता दें, अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन 25 दिसंबर को मनाया जाता है, साल 2018 की 16 अगस्त को उनका देहांत हो गया था।

PM नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज पर रोक लगा दी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि ये फिल्म 11 को रिलीज नहीं होगी। साथ ही चुनाव आयोग ने ये भी कहा है कि लोकसभा चुनावों के बीच जितनी भी बायोपिक रिलीज हो रही हैं, उनके लिए एक कमेटी बनेगी। रिव्यू के बाद ही ऐसी फिल्म रिलीज होंगी। ऐसी बायोपिक फिल्में जिससे भी किसी पार्टी को फायदा हो सकता है, उस पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है।

अब नहीं है कोई ‘धरतीपकड़’

राकेश समाधिया। भारत की राजनीति अगर कई तरह के वाद- विवादों से भरी पड़ी है तो कुछ ऐसे अपवाद हैं,  जिनकी चुनाव में हार के… Read More »अब नहीं है कोई ‘धरतीपकड़’

पार्टी के बढ़ते वर्चस्व को बनाए रखना कांग्रेस की बड़ी चुनौती, केसीआर के थर्ड फ्रंट की भूल से भाजपा को मिलेगा सीधा फायदा !

अब आगामी लोकसभा को ध्यान में रखते हुए गठजोड़ की राजनीति पर ध्यान दिया जाए तो हमें तीन चीजों पर नजर डालनी होगी। पहली मोदी सरकार का पांच साल का कार्यकाल जिससे जनता खुश है या नहीं। दूसरा कांग्रेस और अन्य दलों का यूपीए (यूनियन अपोजिशन फ्रंट) कितना जनता के बीच प्रभावशाली और आगामी लोकसभा में जीत तय करने और जनता का भारोसा कायम कर सरकार बनाने में कामयाब होगा । वहीं तीसरा केसीआऱ का क्षेत्रीय दल को मिलाकर तीसरे विकल्प के तौर पर किया जाने वाला गठजोड़ कितना मायने रखेगा। अगर केसीआर क्षेत्रीय दल के साथ मिलकर बीजेपी और कांग्रेस को चुनौती देने की सोच रही है तो उसे उन क्षेत्रिय दल के नेताओं की महत्वांकक्षाओं  पर भी काबू पाना होगा।

माखनलाल पत्रकारिता विवि पर सीएम कमलनाथ की नजर, 12 साल की नियुक्तियों पर प्रशासन को किया तलब

कमलनाथ सरकार आने के बाद से प्रदेश की राजधानी में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय अब निशाने पर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले 12 सालों में हुई नियुक्तियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को तलब किया है। माना जा रहा है कि देश के इस नामी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 12 सालों में कई बड़े पदो पर गल ती भर्ती हुईं है।

फेसबुक पर हुआ प्यार ले गया पाकिस्तान के तहखानेे तक, 6 साल बाद ऐसे मिली रिहाई

पाकिस्तान में सजा काटने के बाद मंगलवार को हामिद रिहा होकर हिन्दूस्तान आएं हैं। अपने वतन आए हैं। आपको जानकर हैरान होगा यह पढ़ा लिखा नौजवान क्यों पाकिस्तान चला गया था। कारण सिर्फ एक अब उसे नसमझी कहो या इश्क के जज्बात जिसने वहशत में मुल्को की सीमाओं की भी परवाह नहीं की। वहीं इस शख्स की वापसी  कहीं भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में कहीं बची एक छोटी सी आस जैसी है। हामिद की वापसी कई तहखानों में बंद भारतीयों की उम्मीद है। हामिद ने अफगान रास्ते से पाकिस्तान में घुसनेे की कोशिश की थी।

IAS अफसर : कलेक्टरी छोड़ राजनीति में आए थे, जनता ने कहीं का नहीं छोड़ा

कलेक्टर की नौकरी छोड़ी और बीजेपी से विधायकी के लिए खड़े हो गए। कुर्सी तो नहीं मिली पर साथ में यूपीएससी से जो मुकाम हासिल किया उसे भी गंवा दिया। हम बात कर रहे हैं रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी की, इस बार छत्तीसगढ़ की खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। वे कांग्रेस उम्मीदवार उमेश पटेल से 16 हजार 967 मतों से हार गए। उमेश पटेल को 94201 मत तो ओपी चौधरी को 77234 मत मिले।

हमारे तिरंगे को छह बार दुनिया में सबसे ऊंचा फहराने के लिए शुक्रिया चुनग्नीजांग मेेरी कॉम मांगटे

आमतौर पर बॉलिवुड मूवीज को मैं हमेशा हल्के में लेता हूं लेकिन जनवरी 2017 में जब मैंने Mary Kom  मूवी देखी तो मैं अलग ही दुनिया में पहुंच गया। इससे पहले सिर्फ द लेजेंड ऑफ भगत सिंह ऐसी मूवी थी जिसे देखते हुए सीन दर सीन मेरी आंखें नम होती थीं। मैं प्रियंका चोपड़ा या उनकी एक्टिंग का फैन नहीं हूं लेकिन मेरी कॉम मूवी देखते वक्त लगभग हर सीन पर मैं रो रहा था। एक-एक फ्रेम पर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे। पता नहीं ये प्रियंका चोपड़ा की एक्टिंग थी या फिर मुझे पर्दे पर प्रियंका नहीं मेरी कॉम ही दिख रही थीं।

MP Election: क्या आप मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के बारे में जानते हैं ?

मध्यप्रदेश की राजनीति रविशंकर शुक्ल के बिना शुरू नहीं होती। एक ऐसा शख्स जिसने सबसे पहले इस प्रदेश की कमान संभ ाली। आजादी के बाद प्रदेश बटने लगे और नए प्रदेश बनने लगे तो उसी दौरान हिन्दूस्तान के नक्शे के मध्य में एक प्रदेश बना नाम रखा मध्यप्रदेश। कहा भी जाता है जब मध्यप्रदेश के नक्शे को लेकर नेहरू के पास गए तो उन्होंने ने कहा था कि यह ऊंट जैसा कौनसा राज्य बना लाए।

#MPElection2018: सीहोर विधानसभा में किस करवट बैठेगा ऊंट, बागी उम्मीदवारों से मिल रही जोरदार टक्कर

सीहोर- मध्यप्रदेश। प्रदेश की राजनीति को लेकर मुख्य सीट माने जाने वाली सीहोर विधानसभा में इस बार चुनाव रोमांचक स्थिती में आ पहुंचा है। इस विधानसभा से अब कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। यहां बीजेपी में दो तीन फाड़ के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि कोई भी विधायक की कुर्सी पर विराजित हो सकता है।