Atal tunnel : जानिए दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग 'अटल सुरंग' की सभी प्रमुख बातें..

Atal tunnel : जानिए दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग ‘अटल सुरंग’ की सभी प्रमुख बातें..

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दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग ‘अटल सुरंग’ (Atal tunnel) का आज यानी शनिवार 3 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन कर दिया है। इसके साथ ही उद्घाटन समारोह के बाद पीएम मोदी लाहौल स्पीति के सीसू और सोलांग घाटी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस अटल सुरंग के खुल जाने की वजह से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई।

इस अटल सुरंग (Atal tunnel) को हिमालय के पीर पंजाल की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच अत्याधुनिक विशिष्टताओं के साथ समुद्र तल से करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। अटल सुरंग दुनिया में सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है और 9.02 लंबी सुरंग मनाली को सालों भर लाहौल स्पीति घाटी से जोड़े रखेगी। पहले घाटी छह महीने तक भारी बर्फबारी के कारण शेष हिस्से से कटी रहती थी।

आइये इस अटल सुरंग से जुड़ी सभी प्रमुख बातों को जानते हैं..

ये अटल सुरंग घोड़े की नाल के आकार वाली दो लेन वाली सुरंग में आठ मीटर चौड़ी सड़क है और इसकी ऊंचाई 5.525 मीटर है। अटल सुरंग का दक्षिणी पोर्टल मनाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर 3060 मीटर की ऊंचाई पर बना है जबकि उत्तरी पोर्टल 3071 मीटर की ऊंचाई पर लाहौल घाटी में तेलिंग, सीसू गांव के नजदीक स्थित है।

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अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने रोहतांग दर्रे के नीचे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस सुरंग का निर्माण कराने का निर्णय किया था और सुरंग के दक्षिणी पोर्टल पर संपर्क मार्ग की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी। अटल सुरंग (Atal tunnel) की डिजाइन प्रतिदिन तीन हजार कार और 1500 ट्रक के लिए तैयार की गई है जिसमें वाहनों की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।

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घटनाओं का स्वत पता लगाने के लिए हर ढाई सौ मीटर पर सीसीटीवी कैमरा और हर एक किलोमीटर पर वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लगी है। इस सुरंग के दोनों द्वारों पर बैरियर लगे हैं। आपात स्थिति में बातचीत के लिए हर 150 मीटर पर टेलीफोन और हर 60 मीटर पर अग्निशमन यंत्र लगे हैं। सुरंग में हर 60 मीटर की दूरी पर कैमरे भी लगाये गये हैं। हर 25 मीटर पर आपात निकास के संकेत है तथा पूरी सुरंग में ब्रोडकास्टिंग सिस्टम लगाया गया है।

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इसकी आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गयी और इसके बाद से सीमा सड़क संगठन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इसे पूरा करने में जुटा था। रोहतांग दर्रे  के नीचे यह ऐतिहासिक सुरंग बनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में तीन जून 2000 में लिया गया था। सेरी नाला फाल्ट जोन में 587 मीटर क्षेत्र में सुरंग बनाने का काम सबसे चुनौतीपूर्ण था और इसे 15 अक्टूबर 2017 को पूरा किया गया।

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इस सुरंग से हर रोज 3000 कार और 1500 ट्रक 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ जा सकेंगे। सुरंग में अग्नि शमन, रोशनी और निगरानी के व्यापक इंतजाम किये गए हैं। मोदी सरकार ने दिसम्बर 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान में सुरंग का नाम अटल सुरंग रखने का निर्णय किया था, जिनका निधन पिछले वर्ष हो गया।

सुरंग का 40 प्रतिशत कार्य पिछले दो सालों में पूरा किया गया है और इसके निमार्ण पर 3200 करोड़ रूपये की लागत आई है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने 2014 में निमार्ण स्थल का दौरा कर निमार्ण कार्य का जायजा लिया था। पिछले 24 दिसम्बर को पीएम मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वाजपेयी के इसमें योगदान के लिए इस सुरंग का नाम रोहतांग सुरंग के बजाय अटल सुरंग रखने को मंजूरी दी।

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1 thought on “Atal tunnel : जानिए दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग ‘अटल सुरंग’ की सभी प्रमुख बातें..”

  1. The Indian Drama,is to fool the dumb Indians, and to impress their White Masters. The state of Indians is so pathetic, that they ,in 2020,are still mesmerised, by so-called Infra Projects – which can be blown to bits by the Chinese Precision Guided Ammo – assuming PlLA jets do not bomb it !

    The Indian ADS which shot down their own Chopper in Bugdam – will use Indian ADS to protect their tunnel from Chinese Missiles ? Also ,Indians have no ability to strike similar Chinese Infra , in Tibet – except by sending their Jets, deep into Tibet – which will be shot down, by Chinese PLAF and ADS. In any case, Chinese have many tunnels and many logistics options – while India has ONLY 1 TUNNEL..

    Y have the Indians Built this tunnel ? Each tunnel has an entry and an exit,and an approach and an exit road.In the winters, there would be snow,ice and avalanches, and so,the roads will be unusable or will slow down,the logistics, and in some cases, the roads will be closed down.

    Then,the Tunnel covers less than 15%,of the distance,to the target destination.dindooo hindoo

    Therefore,if the PLA bombs the entry OR the exit of the Tunnel,or the Approach road to OR beyond the tunnel or the 100s of Kms of road, after the tunnel – THE TUNNEL WILL BECOME UNUSABLE ! If the road is bombed then the chances of a landslide, are almost 100% ! And if the approach roads ,to the landslide, are also bombed, no crane will reach the location, and the cranes will have to BE AIRLIFTED ,by specialised Choppers which will take time to organise,and will be sitting ducks, even for MANPADs.

    So Y did the Indians build the tunnel ? To save time ? For what ? In war, Time has the proxy of “Inventory”.If time is a vagary of war, then you carry more inventories (of men ,munitions, spares and food).If a war breaks out,the Tunnel will be destroyed, by the PLA – it cannot be defended, by Indian ADS.

    Also,in matters of military logistics,in a war scenario – COST is NOT a Factor – and in any case,saving a few hours in logistics will NOT yield any material reductions in road freight – but will save the air freighting (by C-130s or Choppers)

    Even if a surge is planned by the Indians – it is best done by air – as time is of the essence. Of course the aircargo will be shotdown – but it is easier to blow up the stationery target,id.est.,The Tunnel,and its matrix of impotence.

    The Chinese say that the Indians took 15 years to make the tunnel. The Chinese must understand that the Hindoo God Rama (whose wife ran away,with Ravana- the King of Lanka),took 12 years to make a bridge of stones, to Lanka – and the bridge was MADE ENTIRELY BT APES.

    EVEN AFTER 5000 YEARS,THERE IS NO IMPROVEMENT IN THE CAPABILITIES OF THE INDIANS.

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