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अटल अस्थि कलश यात्रा: बीजेपी ने शुरू की पुरखों की विदाई की नई परंपरा

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PC- साभार पीएम मोद की ट्वीटर वॉल से

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विचार, कार्तिक सागर समाधिया

अटल जी चले गए….. विलाप की मुद्रा में देश! अस्थियों के विसर्जन से पहले सुनियोजित तरीके से पार्टी का हित साधना या फिर बिना किसी लोभ के महान वाजपेयी अंतिम यज्ञ में थोड़ी थोड़ी आहुति देकर देश को अंतिम प्रणाम का मौका देना। जिसके लिए अटल जी जिए, जिसके लिए अटल जी ने अंतिम समय में प्रधानमंत्री तख़्त पर बैठ देश के विश्वासमत को किसी विश्व प्रतापी राजा की तरह गौरांवित किया।
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लेकिन अफसोस जिस अटल के देश में यह अटल जी की अस्थि कलश यात्रा का दौर चल रहा है, उसी अटल के देश का दक्षिणी अंतिम भूभाग केरल प्राकृतिक विपदाओं से घिरा है। हो चुकी 350 लाशों की अस्थियों को ठिकाने लगाने में….मैं वही लिख रहा हूँ जो एक पत्रकार अटल बिहारी वाजपेयी, राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी, कवि अटल वाजपेयी लिखते…
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लगता तो यही है कि चुनाव नजदीक हैं, और अंतिम समय में भाजपा एक एजेंडे के तहत कलश लेकर निकल पड़ी है दरवाजे-दरवाजे…. सरकार के पास ज्यादा कुछ बताने को नहीं है, केरल की भयावह स्तिथी के बीच अटल के विचार भी इन तुच्छ राजनीतिक गतिविधियों के बीच बोने से साबित हो रहें हैं।
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लगता तो यही रहा है कि बीजेपी ने 2019 को देखते हुए अटल बिहारी वाजपेयी को अपना ध्वज वाहक बना लिया है, जिसके ध्वज पर पिछले साल नरेंद्र मोदी का चहेरा भारत के मतदाता को लुभा रहा था। आप भी सोचिये अगर इस समय वाजपेयी जिंदा होते और उनके सामने यह स्तिथी होती जो मोदी सरकार के सामने हैं तो सबसे पहले क्या करते?
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अटल वही राज धर्म निभा हो रहे होते जिसे गुजरात के दंगों के समय अटल ने नरेंद्र भाई को याद दिलाया था। अटल अभी केरल और चेतावनी युक्त विपदाओं से घिरे गोवा को लेकर परेशान नजर आते। केरल राज्य के मुख्यमंत्री को आश्वासन देते और कहते जाओ और जाकर राज्य बचाओ, बचाओ कि इस देश का केरल लुटा जाता है।
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वे कहतें कि जाओ… आर्थिक मदद की चिंता न करना, देश का राज्य कोष तुम्हारी मदद के लिए खुला हुआ है। पर अफसोस मतदाता को लुभाने की कोशिश में उनकी अस्थियों को भुनाया जा रहा है, जिसने कभी इसी केरल या ऐसी किसी केरल समस्या को देखकर कहा था, सरकारें आएंगी सरकारें जाएंगी, लेकिन पहले यह देश रहना चाहिए।
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शायद लाल कृष्ण आडवाणी भी उस अटल विचार को समझ गए हैं जिन्होंने अटल की तरह मौन साध लिया है। यह तो कम लोग ही जानते हैं कि अटल की अस्थियों में राजनैतिक लाभ देखने वाली पार्टी है ‘मोदी की बीजेपी’ या फिर उन्होंने पुरखों को ऐसे विदा करने की नई परम्परा की शुरुआत की है।
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