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रैली में बिना मास्क के हीरो बने घूम रहे थे केजरीवाल हुए कोरोना संक्रमित

कोरोना की तीसरी लहर का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़े बड़े नाम कोरोना संक्रमितों की लिस्ट में आने लगे हैं। मुम्बई में तो कोरोना के मामले बेतहाशा बढ़ रहे हैं, नतीजा के सेलेब्रिटी तक कोरोना पहुंच चुका है। अब दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट कर जानकारी दी है कि वो कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि लक्षण हल्के हैं। खुद को मैंने आइसोलेट कर लिया है। जो मिले हैं मुझसे इन दिनों वो भी टेस्ट करवा लें। सुना है इस दौरान हज़ारों लोगों से मिले हैं केजरीवाल। पंजाब में चुनाव जो है।

अब ये तो सब बड़े लोग हैं, केजरीवाल, एकता कपूर, करीना कपूर वगैरह, आप आम आदमी हैं। आपको कोरोना हुआ तो आपका नाम केवल वार्ड की व्हाटसप लिस्ट में आएगा। कोई चैनल नीचे की पट्टी में भी आपका नाम नहीं चलाने वाला। इसलिए फेमस होने का चांस अब नहीं है। इसलिए मास्क लगाइए, सोशल डिस्टेनसिंग का ध्यान रखिये।

चुनाव आयोग चाहता क्या है?

दूसरी लहर में बंगाल के चुनाव कराने के बाद चुनाव आयोग खुद को कोरोना प्रूफ समझने लगा है। यूपी का चुनाव टालने की हिम्मत वो नहीं दिखा पाया। कहता है सभी पार्टियां चुनाव कराना चाहती हैं। अरे ये देश पार्टियों का है या जनता का? लोगों से तो पूछ लो कि वो जान जोखिम में डालकर नकारे नेताओं को 5 साल के लिए चुनना चाहेंगे या नहीं?

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दूसरी लहर का जो सबसे भयानक मंज़र देखा गया वो दिल्ली और यूपी में ही था, ऑक्सीजन के बिना लोग तड़प कर मर रहे थे और मरने के बाद लावारिस लाशें गंगा में तैर रही थी। लेकिन यहीं के नेता सबसे ज़्यादा डेरिंग बाज़ हैं। केजरीवाल की तो केसों की संख्या देखकर सांसे फूल रही थी, न ऑक्सीजन के टैंकर थे न अस्प्ताल में जगह। लोगों को सावधानी बरतने का संदेश टीवी में देकर खुद बिना मास्क के लोगों के बीच रैली करने वाले ये नेता क्या जनता को मूर्ख समझते हैं।

प्राण जाए पर चुनाव हो जाए

सारी पार्टियां चुनाव चाहती हैं, क्योंकि सत्ता आएगी तो कितने मारे इनके आंकड़े भी छिपाए जा सकेंगे। बड़ा-बड़ा विज्ञापन देकर यह साबित कर दिया जाएगा कि सब खुशहाल है। नेता चुनाव के लिए जीते हैं और चुनाव के लिए मरते हैं। इस गलत फहमी में मत रहिएगा की उनको जनता की फिक्र है। कोई भी पार्टी हो BJP का तो छोड़ ही दीजिए, लोग मरते रहे मोदी जी बंगाल में रैलियां करते रहे। इससे ज़्यादा असंवेदनशील इंसान आपने देखा है कहीं? बाकी पार्टियां भी ऐसी ही हैं। इसलिए अपना ध्यान रखिये, नेताओं को कुछ हुआ तो मैक्स जैसे अस्प्ताल बने हैं उनके लिए। तुम्हे जिला अस्पताल के फर्श पर भी जगह नहीं मिलेगी।