Home » Anti Hindu Dainik Bhaskar: अब आप क्रोनोलॉजी समझिए

Anti Hindu Dainik Bhaskar: अब आप क्रोनोलॉजी समझिए

dainik bhaskar anti hindu
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

आज ट्विटर पर टॉप ट्रेंड है Anti Hindu Dainik Bhaskar समझ तो आप गए ही होंगे ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन फिर भी एक बार देश के सबसे बड़े अखबार दैनिक भास्कर की यहां तक की यात्रा को समझ लेते हैं। दैनिक भास्कर देश के 6.63 करोड़ लोग पढ़ते हैं। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है, इसकी रीडरशिप मुख्यत: हिंदी पट्टी के राज्यों में है। यह वो क्षेत्र है जहां से देश की राजनीति तय होती है। इस अख़बार के छपने की शुरुवात 1956 में भोपाल में हुई थी। तब से अब तक भास्कर लोगों का प्रिय अख़बार रहा है।

क्यों देश का सबसे बड़ा अखबार है निशाने पर?

दैनिक भास्कर देश के सबसे पुराने अख़बारों में से एक है। अब तक इसकी पत्रकारिता पर सवाल नहीं खड़े किये गए। लेकिन 22 जुलाई 2021 के बाद से सबकुछ बदल गया। आयकर विभाग ने दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर छापे मारे। अखबार ने कहा कि उनकी बेखौफ पत्रकारिता की वजह से उनपर सरकार दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

दरअसल कोरोना महामारी के दौरान दैनिक भास्कर समूह ने सरकार द्वारा छुपाए जा रहे मौत के आंकड़ों को सामने लाने का काम किया। भास्कर ने गंगा किनारे बसे शहरों में जाकर लाशों के आंकड़े जुटाए और छापे।

जब भोपाल में कोरोना से मौत के सरकारी आंकड़े सरकार छुपाने लगी तो भास्कर ने साहस दिखाकर श्मशान घांटों में जलाए जा रहे शवों की तस्वीर को प्रथम पन्ने पर छाप दिया। और सरकार की आंखों में आंख डालकर कहा कि आपके आंकड़े झूठे हैं।

ALSO READ: भारत में प्रेस की आज़ादी…जैसे परकटा तोता बादशाह के दरबार में

दूसरी लहर के दौरान पूरा देश सहमा हुआ था। लोग बेबस थे, वो आक्सीज़न और अस्पताल में बेड के लिए दर दर भटक रहे थे। प्रशासन उस वक्त सोया हुआ था, यह हर व्यक्ति अपने परिजन को बचाने के लिए बेताब था। जनप्रतिनिधी घरों में छिपे बैठे थे। लोक वॉट्सैप और सोशल मीडिया पर दवाईयों के लिए भीख मांग रहे थे। एक एक रैमडिसविर का इंजैक्शन 25 हज़ार में मिल रहा था।

READ:  Income tax raid on Newsclick and Newslaundry office

तब सरकार कह रही थी की सबकुछ ठीक है, कोई कमी नहीं है, सब चंगा है और वो अखबार जो एंटी हिंदू नहीं है, वो मीडिया संस्थान जो एंटी हिंदू नहीं है सरकार की हां में हां मिला रहे थे। जब राजा कहता था रात है तो वो कहते थे रात है। जब राजा कहता था दिन है तो वो कहते थे हां दिन है। ऐसे सभी मिडिया संस्थानों के यहां कोई वित्तीय अनियमितता नहीं पाई गई। न ही इनकम टैक्स ने उन दफ्तरों पर छापे मारे और न ही सोशल मीडिया पर उन संस्थानों के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई गई।

दैनिक भास्कर ने लोगों के सामने सच लाने का काम किया। उसकी पत्रकारिता की वजह से सरकार पर ढंग से काम करने का दबाव बना। जब सारा तंत्र सरकार के पाले में जाकर खड़ा हो गया तब भास्कर ने जनता के पाले में जाकर खड़े होने का साहस दिखाया। आप खुद ही सोचिए अगर आप कोई वित्तीय गड़बड़ी कर रहे हैं और आपके दिल में चोर है तो आप कोतवाल से बना कर रखेंगे या उसकी नाक में उंगली डालेंगे?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है…

जबसे देश में सरकारों को मिडिया की ताकत का एहसास हुआ तभी से तमाम सरकारों ने इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई या अन्य किसी तोते की मदद से मिडिया पर लगाम लगाने की कोशिश की है। इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी के दौरान मीडिया ने सबसे बुरा दौर देखा था। 2014 के बाद आई सरकारों ने मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए एडवर्टाईज़िंग पॉलिसी में बदलाव किए। अब वे उन्ही मिडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापन देते हैं जो उनके खिलाफ पत्रकारिता नहीं करते। सरकार ने इन मीडिया संस्थानों के मैनेजमेंट तक में दखल देना शुरु कर दिया। कौनसा एंकर रहेगा कौन जाएगा यह तक सरकार के दबाव में तय होने लगा। पिछले 7 सालों में कई पत्रकार जो सरकार से तीखे सवाल करते थे, चैनलों से निकाल दिये गए। अब अगर देखा जाए तो देश का 90 फीसदी मीडिया सरकार के चरण में दिखाई देता है। जो 10 फीसदी संस्थान पत्रकारिता को बचाने के लिए लड़ रहे हैं उन पर भी किसी न किसी तरह नकेल कसने की कोशिश की जा रही है।

READ:  CM Amrinder Singh के इस्तीफे को लेकर बड़ा खुलासा, उनके साथ ही कई और मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

क्या है क्रोनोलॉजी?

सरकार के प्रति आलोनात्मक पत्रकार और संस्थानों पर पहले दबाव बनाया जाता है। वो फिर भी नहीं मानते तो उनके खिलाफ पुराने केस खोले जाते हैं या कोई नया केस गढ़ा जाता है। अगर वे फिर भी नहीं मानते तो ईडी और इनकम टैक्स के छापे पड़वाए जाते हैं। यह केस बरसों तक कोर्ट में चलते रहते हैं, लेकिन इन केस में फैसला नहीं आता क्योंकि यह केस मनगढ़ंत होते हैं। लेकिन इनकी मदद से सरकार लंबे समय तक संस्थान को दबाव में रखती है। जब यह सब भी काम करना बंद कर देता है तो सरकार मीडिया संस्थान की रीच को कम करने की कोशिश करती है। चैनल केबल टीवी से गायब करवा दिए जाते हैं, और अखबार के सर्कुलेशन को प्रभावित किया जाने लगता है। इसके साथ उस संस्थान को लोगों की नज़र से गिराने के लिए सोशल मीडिया पर सरकारी आईटी सेल अखबार के खिलाफ हैशटैग ट्रेंड करवाती है, उसे ऐंटीनेशनल या एंटी हिंदू साबित करने लगती है। आज का ट्रेंड Anti Hindu Dainik Bhaskar उसी का नतीजा है।

You can connect with Ground Report on FacebookTwitter and Whatsapp, and mail us at GReport2018@gmail.com to send us your suggestions and writeups.