जैन धर्म के खिलाफ जहर उगलने वाले अनूप मंडल के बारे में ये 5 बातें आपको जान लेना चाहिए

Anoop Mandal: पिछले कुछ महीनों से अनूप मंडल की खबरें काफी चर्चा में है। यह एक संगठन है जो ग्रामीण और कम पढ़े लिखे लोगों को गांव-गांव में जाकर जैन धर्म के खिलाफ भड़काता आ रहा है। Anoop Mandal उत्तर भारत के राज्यों में सक्रिय है। यह हर परेशानी का कारण जैन धर्म को बतलाता है और उन पर बे-बुनियाद आरोप लगता रहता है।

1) अनूप मंडल क्या है

यह एक संगठन है जिसका एकमात्र लक्ष्य जैन धर्म के खिलाफ बोलना और लोगों को उनके प्रति भड़काना है। यह पूरा संगठन अनूप दास की लिखी किताब ‘जगत हितकारी’ को अपना ग्रंथ मानते हैं। यह किताब 110 साल पहले लिखी गई थी। अनूप संगठन पहले सिर्फ महाजनों की आलोचना करते थे लेकिन अब जैन धर्म के खिलाफ हिंसा का भी प्रयोग करते हैं।

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2) 1920 में हुए इस जैन विरोधी संगठन की शुरुआत

असल में इन लोगों के पास कोई ज्यादा रिसर्च और विश्वास करने वाला लिटरेचर नहीं है। 1991 में ऑडियंस गैदरिंग: द जैन्स इन सोसाइटी नामक एक किताब पढ़कर 1920 में अनूप दास नाम के एक व्यक्ति ने इस जैन विरोधी संगठन की शुरुआत की थी।

इस किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे अनूप मंडल के कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारत में जैन गाँवों पर छापा मारा और बाद में सरकार ने इसपर बैन लगा दिया, जिसमें ज्यादातर जैन मंत्री थे।

3) फिर उठी इसे प्रतिबंद्ध करने की मांग

जैन धर्म के लोग ट्विटर और इंस्टाग्राम पर इस संगठन को बैन करने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसके 50 लाख से भी ज्यादा फ़ॉलोअर्स हैं। लेकिन कारवाही की मांग भी बढ़ती जा रही है पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया ने भी मुख्यमंत्री गहलोत को पत्र लिखकर इसपर प्रतिबंध लगाने की मांग करी है।

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4) जैन धर्म गुरुओं पर किए हमले

वर्तमान समय में यह संगठन कोरोना महामारी के विषय में उपदेश दे रहें है और इस बीमारी का कारण जैन बनियों और भिक्षुओं को बता रहे हैं। यह संगठन शुरुआत से ही लगातार जैन धर्म पर हमले करता आ रहा है। 2017 से अभी तक 500 जैन भिक्षुओं की हत्या की जा चुकी है। यह ग्रामीण लोगों के दिमाग में जैन भिक्षुओं को पत्थर मारने के लिए जहर भरता है।

5) धर्म के नाम पर कब तक होंगे हमले

भारत में पिछले कुछ समय से अल्पसंख्यकों पर हमले काफी बढ़ गए हैं, फिर चाहे वो मुस्लिम,क्रिस्चन या जैन किसी भी धर्म का हो। लेकिन कोई भी समुदाय एक-दूसरे पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाता जब तक खुदपर आंच न आ जाए सब चुप बैठे रहते हैं।

भारत का संविधान अपने सेक्युलर ढांचे की तरह हर पंथ को अपने धर्म को मानने की आज़ादी देता है। पर फिर भी धर्म के प्रति कट्टरता बढ़ती जा रही है और इसका सभी को नुकसान होता है।

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