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Animal Serum: वैक्सीन बनाने में Animal Serum क्यों और कितना जरूरी है?

Animal Serum
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Animal Serum: पूरे विश्व में वैज्ञानिक डॉक्टरों ने कई तरह की वैक्सीन बनाई हैं। कुछ वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां ऐसी हैं जो इंसान की ताकत को बढ़ाने के लिए, उसके स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए, खुद भी वायरस का इस्तेमाल करती हैं। Animal Serum : यहीं अगर कोरोना वैक्सीन की बात की जाए तो उसमें भी काफी जानवरों के (serum) इस्तेमाल हुए होंगे, जिससे (covid-19) जैसी दूषित बीमारी की वैक्सीन तैयार हुई है।

कैसे तैयार की जाती है प्रयोगशाला में वैक्सीन

वैक्सीन में इस्तेमाल हुए वायरस को इंसान के शरीर में लगने से पहले मार दिया जाता है या फिर निष्क्रिय कर दिया जाता है। फिर भी ये वायरस इंसान में इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर होते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो वैक्सीन में इस्तेमाल होने से पहले इन वायरस को प्रयोगशालाओं में विकसित किया जाता है। वैज्ञानिक इन वायरस को उचित वातावरण देते हैं। इसी क्रम में कुछ पोषक तत्व होते हैं जो इन वायरस के लिए जरूरी होते हैं ये पोषक तत्व ही घोड़े, गाय, बकरी और भेड़ जैसे जानवरों के ऊतकों से निकाले जाते हैं।

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Animal serum के बारे में सरकार का क्या कहना है

सरकार ने बुधवार को एक स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि हैदराबाद में स्थित भारत बायोटेक ने जो कोरोना की वैक्सीन बनाई है उस को-वैक्सीन में नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। क्या वास्तव में कोवैक्सीन में बछड़े का सीरम मिला होता है इसके जवाब में सरकार ने दोहराया, कि वैक्सीन के बनने में नवजात बछड़े समेत कई जानवरों के सीरम का इस्तेमाल होता है।

जानिए रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा

भारत सरकार ने बयान जारी किया है कि नवजात बछड़े के सीरम का उपयोग केवल वेरो कोशिकाओं की वृद्धि के लिए किया जाता है। विभिन्न प्रकार के गोजातीय और अन्य पशु सीरम वेरो सेल विकास के लिए विश्व स्तर पर उपयोग किए जाने वाले मानक संवर्धन घटक हैं। वेरो कोशिकाओं का उपयोग कोशिका जीवन को स्थापित करने के लिए किया जाता है, जो टीकों के उत्पादन में मदद करते हैं। पोलियों , रेबीज और इन्फ्लुएंजा के टीकों में दशकों से इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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