बीजेपी के चाणक्य ने मानी गलती, ‘गोली मारो’ जैसे बयानों से हुआ नुकसान

ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

गृह मंत्री और भाजपा के चुनावी चाणक्य अमित शाह (Amit Shah) ने दिल्ली चुनावों (Delhi Election 2020) में हुई हार पर अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने टाइम्स नाउ समिट (Times Now Summit)में कहा कि दिल्ली चुनावों के जो परिणाम आए इसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी, उन्हें भरोसा था कि पार्टी को बहुमत हासिल होगा। उन्होंने कहा कि शायद पार्टी को भाजपा नेताओं द्वारा दिये गए ‘गोली मारो’ जैसे बयानों का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वोटर यह तो बता नहीं सकता कि उसने वोट क्यों नहीं दिया लेकिन मेरा मानना है कि पार्टी को गलत बयानों से नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव की तरह हम दिल्ली चुनावों का भी आंकलन कर रहे है और कहां कमी रही इसका मूल्यांकन कर रहे हैं।

आपको बता दें कि दिल्ली चुनाव में अमित शाह ने काफी आक्रामक प्रचार किया था। प्रधानमंत्री मोदी से ज़्यादा जनसभाएं अमित शाह ने की थी। पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों समेत योगी आदित्यनाथ और सहयोगी दल के नेताओं को भी चुनाव प्रचार में उतारा था। पार्टी की ओर से नेताओं ने काफ़ी आपत्तिजनक बयान दिए। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने खुलेआम जनसभा में ‘गोली मारो’ जैसे नारे लगवाए जिसपर चुनाव आयोग ने कार्यवाही की लेकिन पार्टी को ओर से कोई एक्शन नहीं लिया गया। बीजेपी नेता परवेश वर्मा ने शाहीन बाग़ पर कहा था कि ये लोग आपके घर में घुसेंगे, आपकी बहु बेटियों का बलात्कार करेंगे तब अमित शाह और मोदी जी बचाने नहीं आएंगे। पार्टी के नेताओं ने केजरीवाल को आतंकवादी तक कह डाला। अमित शाह ने खुद भी ईवीएम का बटन ज़ोर से दबाकर शाहीन बाग़ में करंट वाला बयान दिया था। योगी आदित्यनाथ ने भी कई जनसभाओं में आपत्तिजनक बयान दिए। पार्टी आलाकमान ने इन बयानों पर खामोशी बनाए रखी जिससे यह साफ संदेश गया कि ये सोची समझी रणनीति के तहत किया गया।

Also Read:  'Will end Muslim reservation in Telangana': Amit Shah in Hyderabad

दिल्ली चुनावों में दिए गए कड़वे बयान भाजपा पर भारी पड़े। भाजपा ने पूरा चुनाव शाहीन बाग़ और देशद्रोह के मुद्दे पर लड़ने की कोशिश की जो बैक फायर कर गया। एक सर्वे के मुताबिक भाजपा के कोर वोटर ने भी इस चुनाव में उसका साथ नहीं दिया। राष्ट्रीय मुद्दे और प्रधानंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ा गया यह चुनाव कारगर साबित नहीं हुआ। भाजपा ने स्थानीय मुद्दों को कम तरजीह दी। इस साल के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं वहां भाजपा नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ने जा रही है। ऐसे में पार्टी को नई रणनीति तैयार करनी होगी।

आप ग्राउंड रिपोर्ट के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।