पटना: आमिर हंज़ला की हत्या में कुछ हिंदुत्ववादी संगठन से जुड़े लोगों का हाथ! पुलिस

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

देशभर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के खिलाफ़ लगातार प्रदर्शन जारी हैं। बीते 21 दिसंबर को नागरिकता क़ानून के विरोध में बिहार की राजधानी पटना में भी विरोध प्रदर्शन किया गया था। इसी प्रदर्शन रैली में 18 वर्षीय आमिर हंज़ला भी आया था, जो प्रदर्शन के दौरान लापता हो गया था। दस दिन तक लापता रहने के बाद हंज़ला की लाश बराबद हुई। हंज़ला की हत्या के संबंध में पुलिस ने हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।

हंज़ला का शव सड़ जाने के कारण पुख्ता पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकी!

दस दिनों तक लापता रहने के बाद आमिर हंज़ला की गली-सड़ी लाश को 31 दिसंबर की सुबह एक जलाशय के पास से बरामद किया गया। हंज़ला की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि किसी धारदार चीज़ से हंज़ला के पेट पर वार किया और साथ ही किसी भारी वस्तु से उसके को कुचला गया। डॉक्टर हंज़ला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अन्य ज़ख्मों पर कुछ सटीक नहीं लिख सके। डॉक्टरों के अनुसार हंज़ला का शव सड़ जाने के कारण कुछ पुख्ता रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकी।  

पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की !

बीते 21 दिसंबर को बिहार क राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार बंद का आह्वान किया था। राजधानी पटना में इस बंद के बाद प्रदर्शन का रूप हिंसक हो गया था। आमिर हंज़ला को भी इसी जुलूस में तिरंगा लेकर देखा गया। जब देर रात तक हंज़ला घर वापस नहीं लौटा तो उसके परिजन रात करीब 11 बजे फुलवारी शरीफ़ थाने इसकी शिकायत लिखवाने पहुंचे। परिजनों का कहना है कि उस वक्त पुलिस ने ये कहकर गुमशुदगी कि रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया कि वे थके हुए हैं और सीनियर पुलिस अफसर भी नहीं हैं। फिर भी किसी तरह परिजनों ने कागज पर गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखकर थाने में जमा कर दिया।

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गौरतलब हो कि 21 दिसंबर के राजद के बंद को लेकर फुलवारी शरीफ में खूब बवाल हुआ था। बताया जाता है कि राजद का जुलूस फुलवारी शरीफ से होकर गुजर रहा था, तभी संगत गली के पास सीएए और एनआरसी के समर्थकों के जवाबी जुलूस से उसकी भिड़ंत हो गई थी।आरोप है कि एनआरसी समर्थकों की तरफ से पथराव और गोलीबारी भी की गई। हालात को बेकाबू होता देख पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। पथराव व मारपीट में आधा दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।

परिजनों का पुलिस पर लापरवाही का आरोप !

अमीर के भाई साहिल के मुताबिक, 22 दिसंबर की शाम को एक अज्ञात नंबर से उनके पास कॉल आया था। कॉल करने वाले ने बताया था कि उसकी हत्या कर दी गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अमीर हंजला केस में पहली लीड 30 दिसंबर को मिली, जब तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनसे पूछताछ की गई, तो उन्होंने अमीर हंजला की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।

फुलवारी शरीफ थाने के एसएचओ रफीकुर रहमान ने बताया, ‘अब तक छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और उन्होंने हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में कुछ और लोग शामिल हो सकते हैं। हम लोग उनकी गिरफ्तारी के लिए भी अभियान चला रहे हैं।’

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘आरोपियों ने बताया है कि अमीर की हत्या संगत गली में की गई थी और ऐसा लगता है कि आरोपियों को पता था कि अमीर सीएए व एनआरसी के विरोध में निकले जुलूस में शामिल था।’

पुलिस के अनुसार, हिंदुत्ववादी संगठन से जुड़े लोगों का हाथ!

पुलिस ने इस हत्या में गिरफ्तार आरोपितों की शिनाख्त नागेश सम्राट, रईस पासवान, चैतु महतो, सनोज महतो, विकास और दीपक कुमार के रूप में की है। सभी संगत गली के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, नागेश सम्राट हिंदूपुत्र नाम के संगठन से जुड़ा हुआ है, जबकि अन्य आरोपी का प्रत्यक्ष संबंध हिंदू समाज पार्टी से है।

पिता सोहैल अहमद कहते हैं, “एक कमाने वाला था। वो भी गया। अब फिर से किसी की पढ़ाई छुड़ानी पड़ेगी। मेरे बेटे की भरपायी तो नहीं हो सकती। मगर मैं बिहार सरकार से इतनी ही गुज़ारिश करूंगा कि हम मज़लूमों पर रहम करे। कम से कम हमें उचित मुआवज़ा दे दे। मेरे एक बेटे को नौकरी दे दे। जिससे हमारा परिवार चल सके।”

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