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Indira Gandhi: आपातकाल से पहले इंदिरा गांधी के खिलाफ उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

Allahabad High Court
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Indira Gandhi: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आपातकाल से पहले 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। वहीं ऐसा माना जाता है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले (Allahabad High Court Order Against Indira Gandhi) की वजह से भारत में आपातकाल लगाया गया था। आपको बता दें कि 26 जून, 1975 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने रेडियो पर घोषणा कर कहा था कि, राष्ट्रपति ने आपातकाल की घोषणा की थी। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी के कहने पर 25 जून, 1975 को संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की।

क्या था पूरा मामला

दरअसल ये कहानी 1971 में रायबरेली के लोकसभा चुनाव से शुरू होती है। इंदिरा गांधी ने वहां से जीत हासिल की थी। उनकी जीत को प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मुक़दमे को इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण के नाम से जाना जाता है। वहीं 12 जून, 1975 को जब फैसला होने वाला था। तब सुबह 10 बजे से पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट का कोर्टरूम नंबर 24 पूरी तरह से भर चुका था। जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा पर पूरे देश की नज़रें थीं, क्योंकि वो राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी के मामले में फ़ैसला सुनाने जा रहे थे।

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देश में आपातकाल लगाने का क्या कारण था?

देश में आपातकाल लगने का कारण यह माना जाता है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के द्वारा लिए गए फैसले जो आपातकाल घोषित होने से 13 दिन पहले आए थे।उसकी वजह से आपातकाल लगाया गया था। 1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली में इंदिरा गांधी से हारे हुए राज नारायण ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। जिसके बाद से अदालत ने 12 जून, 1975 को अपने फैसले में इंदिरा को चुनाव लड़ने और छह साल के लिए किसी भी पद पर रहने से रोक दिया था।

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हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ इंदिरा गांधी ने दायर की थी अपील

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ इंदिरा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। शीर्ष अदालत ने फैसले को बरकरार रखा लेकिन इसने उन्हें प्रधान मंत्री के रूप में बने रहने की अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर, जयप्रकाश नारायण, जिन्हें जेपी के नाम से भी जाना जाता है, ने लोगों से इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन करने का आग्रह किया था। जेपी की अपील के बाद, मोरारजी देसाई और जेपी जैसे नेताओं के नेतृत्व में देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन होने लगे थे।

इंदिरा गांधी दो मामलों में पाई गईं थीं आरोपी

राजनारायण की याचिका में जो सात मुद्दे इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ गिनाए गए थे।उनमें से पांच में तो जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी को राहत दे दी थी, लेकिन दो मुद्दों पर उन्होंने इंदिरा गांधी को दोषी पाया था। आपको बता दें कि इंदिरा गांधी ने सरकारी साधनों का दुरुपयोग किया है था। जिसके बाद उन्हें अगले छह सालों तक लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया गया था।

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इंद्रा गांधी ने आपातकाल लगाने का लिया था फैसला

आपको बता दें कि विरोध और विपक्ष के लगातार दबाव को देखते हुए इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने का फैसला किया था। जो 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ था। यह भी माना जाता है कि इंदिरा गांधी ने यह फैसला अपने बेटे संजय गांधी की सलाह पर लिया था।

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