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सरकारी तंत्र में ‘मुसद्दी लाल’ बने देश के शोधार्थी, फेलोशिप में वृद्धि के लिए एक बार फिर करेंगे आंदोलन

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देश भर के रिसर्च फेलो इन दिनों सरकार से खासा नाराज चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण है रिसर्च फेलो के तहत मिलने वाला फंड न तो बढ़ाया जा रहा है न ही समय पर पहुंच रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे देश के हजारों युवा रिसर्च फेलो यूं तो बीते कई दिनों से सरकारी तंत्र में फंसे किसी ‘मुसद्दी लाल’ की तरह कभी इस दफ्तर तो कभी उस मंत्रालय के चक्कर काट रहे हैं सरकार के खिलाफ आंदोलन भी कर चुके हैं लेकिन अब उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा बंदी का पक्का मन बना लिया है।

इस मामले में वॉइस ऑफ रिसर्च स्कॉलर नाम की एक संस्था ने अपने सभी सहपाठियों के लिए एक लेटर जारी कर अपील की है कि वे अपनी मांगों के लिए हर शोध संस्थान में हस्ताक्षर अभियान चलायेंगे और आगामी 20 दिसंबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का घेराव करें। आप इस लेटर को यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं…

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“प्रिय मित्रों…
आप सभी शोध विद्वानों को बताना चाहते है की हम पिछले ४ महीने से लगातार फ़ेलोशिप बृद्धि के लिए मंत्रालय, सचिवालय सभी से मिल रहे है। इसके लिए पुरे भारत में शोध विद्वानों ने हर संस्थान में हस्ताक्षरअभियान भी चलाया और धरने भी किये, और हम लोगो ने पत्राचार और ईमेल के माध्यम से और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात को रखा, उसके बाबजूद भी हमे, हमारी सरकार की तरफ से अभी तक फ़ेलोशिप बृद्धि के लिए लिखित में कोई ज्ञापन नहीं आया है।

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“जबकि २०-११-२०१८ को प्रोफेसर के विजय राघवन, भारत सरकार के प्रधान अध्यापक वैज्ञानिक सलाहकार के पद पर है। उनसे हम लोग मिलकर फ़ेलोशिप बृद्धि को लेकर चर्चा कर चुके है और अभी तक कोई जवाब नहीं आया ,अब हमे बिबस होना पड़ रहा है। आप सभी से विनम्र निवेदन है आप सभी लोग सभी मंत्रालय और सचिवालय में मेल करें और हम सभी लोगो की तरफ से एक कॉमन मेल किया जायेगा और उसके बाद उनके रिप्लाई का इन्तजार करेंगे जो भी रिप्लाई आता है उसके अनुसार हम लोग अपनी मुहीम को बहुत तेजी से शुरूवात करेंगे।”

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“इस दौरान हम लोग उन जिम्मेदार लोगों से मिलने की कोशिश कर उनके सामने अपनी बात रखेंगे। अगर सरकार में बैठे ये जिम्मेदार लोग हमसे मिलते हैं और हमारी बात सुनते हैं तो ठीक है नहीं तो हम अपनी आवाज पुरे देश के शोधार्थियों तक फैलाएंगे और बताएंगे कि मंत्री और सरकारी आला अधिकारी न तो हमसे मिलने को तैयार है और न ही हमारी फेलोशिप बढ़ाने के मामले में संवेदनशील हैं।”

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“अबकी बार देश व्यापी आंदोलन होना चाहिए। आप सभी शोध छात्रों से विनम्र निवेदन है कि सभी लोग को 20 दिसंबर के बाद मानव संसाधन मंत्रालय के बाहर बहुत बड़ी संख्या में धरना जारी रखेंगे और देश के सभी शोध विद्वानों से आग्रह है कि अगर सभी लोगो को अपने अधिकार के लिए छुटटी लेना पड़े तो जरूर लें। साथियो अब हमे एक जुट होना होगा। पुरे भारत के सभी संस्थानों में एक साथ एक समय पर धरना होना चाहिए और विश्वव्यापी आंदोलन होना चाहिये, यही आप लोगो से निवेदन है। सरकार शोध छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकती।

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बता दें कि नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट/NET), ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट/GATE) सहित कई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को यूजीसी सहित कई अन्य एजुकेशन फंडिग एजेंसी से मिलने वाली फेलोशिप बीते चार वर्षों से नहीं बढ़ी है। बीते चार सालों में महंगाई का स्तर भले ही कई गुना बढ़ गया हो लेकिन ये रिसर्चर आज भी पुराने मानदेय और भत्ते पर अपना गुजारा कर रहे हैं।

फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता सहित अपनी तमाम मांगों को लेकर देशभर के कई रिसर्च फेलो लैब और इंस्टिट्यूट से निकल सड़कों पर उतर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। हांलाकि यह पहला मौका नहीं है जब देश भर के लाखोंं जूरनियर रिसर्च फेलो और सीनियर रिसर्च फेलो मानदेय बढ़ाने के लिए इस तरह अपनी आवाज बुलंद कर रहे हो।

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इससे पहले फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता बढ़ाने के लिए साल 2014 में भी कुछ इसी तरह हजारों रिसर्च फेलो ने आंदोलन कर सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था। शायद यही कारण है कि सरकार अब तक ऐसी कोई पॉलिसी नहीं ला पाई है जिससे बिना आंदोलन के ही इन रिसर्चर्स की आवाज सुनी जाए।