Sat. Oct 19th, 2019

groundreport.in

News That Matters..

जानिए एक ऐसे न्यूज़ चैनल के बारे में जिसकी आवाज़ दबाने के लिए बेताब हैं कई देश

1 min read

न्यूज़ डेस्क।। मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर इस समय दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। कई देशों में सत्ताधारियों पर मीडिया पर नियंत्रण के आरोप लग रहे हैं। भारत और अमेरिका जैसे देश, जहां लोकतांत्रिक सरकारें हैं, वहां भी प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खडे़ हो रहे हैं। 2018 में जारी हुई वर्लड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की रिपोर्ट पर नज़र डालें तो 180 देशों में प्रेस स्वतंत्रता के मामले में नॉर्वे पहले, अमेरिका 45वे और भारत 138वे नंबर पर है, वहीं उत्तर कोरिया को इस लिस्ट में आखिरी स्थान पर रखा गया है।

सोचिए जब लोकतांत्रिक देशों में मीडिया की स्वतंत्रता का यह हाल है तो अन्य देशों में पत्रकारिता कैसे होती होगी। वो देश जहां लोकतांत्रिक सरकारे नहीं है, वहां समाचार पत्र और न्यूज़ चैनलों को सरकार अपने मुखपत्र की तरह इस्तेमाल करती हैं। उन्हे सरकार के खिलाफ बोलने की आज़ादी नहीं होती। टीवी, रेडियो और अखबारों को सरकार कठपुतली की तरह इस्तेमाल करती है, ताकि देश में उनके खिलाफ़ माहौल न बने और वे निरंकुश होकर शासन करते रहें। लेकिन कई ऐसे मीडिया संस्थान हैं जिन्होने बिना किसी से डरे सच को दुनिया के सामने लाने का साहस दिखाया है। ऐसा ही एक न्यूज़ नेटवर्क है अलजज़ीरा, जिसने पश्चिमी मीडिया के एकाधिकार को तोड़कर अरब देशों में चल रहे संघर्ष और समस्याओं को दुनिया के सामने लाने का साहस दिखाया। लेकिन आज इस न्यूज़ चैनल को कई अरबी देशों में बैन किया जा चुका है। और अब यह चैनल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रहा है।

अलजज़ीरा की स्थापना 1996 में कतर के सत्ताधारी शाही परिवार ने की जिसने पत्रकारों को बिना किसी दबाव के लिखने और रिपोर्ट करने की आज़ादी दी। कुछ ही सालों में खाड़ी देशों के शासकों की आलोचना और निश्पक्ष रिपोर्टिंग ने अलजज़ीरा की लोकप्रियता में भारी इज़ाफा कर दिया। अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद ओसामा बिन लादेन का संदेश प्रसारित करने के बाद अलजज़ीरा को विश्व स्तर पर पहचान मिली।

alja
अफगानिस्तान और ईराक युद्ध की बेखौफ लाईव रिपोर्टिंग ने पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी। अलजज़ीरा ने कई आतंकवादियों और कटर्रपंथियों के इंटर्व्यू किए जिससे उसपर आतंकवाद को बढ़ावा देने के भी आरोप लगे। कतर सरकार की वित्तीय मदद से चलने वाले इस चैनल पर सरकार के प्रोपगेंडा को आगे बढ़ाने का भी आरोप भी लगा। लेकिन सरकार ने चैनल पर किसी भी तरह के दबाव की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

2006 में अलजज़ीरा ने अपना अंग्रेजी संस्करण लांच किया उसके बाद बेखौफ और निश्पक्ष पत्रकारिता के लिए इस चैनल को कई सम्मानों से नवाज़ा गया। जिसमें अरब देशों को संचार के माध्यम से दुनिया से जोड़ने के लिए ” इंडेक्स ऑन सेंसरशिप” अवार्ड शामिल है। 2004 में एक वेबसाईट द्वारा अलजज़ीरा को एप्पल, गूगल और स्टारबक्स के बाद सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाले ब्रांड में शामिल किया गया।

अलजज़ीरा ने जितनी तारीफे बटोरी उससे ज़्यादा आलोचना उसके खाते में आई। दुनिया भर के देशों ने अलजज़ीरा पर आतंकवाद को बढ़ावा देने, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को आवाज़ देने के आरोप लगाए। भारत ने भी 2015 में कश्मीर का गलत नक्शा दिखाने की वजह से अलजज़ीरा पर 5 दिन का बैन लगाया था।

2017 में जब कतर के अरब देशों से कूटनीतिक संबंध संकट में आए तो इसकी सबसे बड़ी गाज अलजज़ीरा पर गिरी। गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के मेंबर साउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिश्र जैसे देशो ने कतर पर ईरान के साथ संबंध और क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए और सभी तरह के कूटनीतिक संबंधो को खत्म करने की घोषणा कर दी और सज़ा के एवज़ में 13 मांगे रखीं जिसमें अलजज़ीरा पर बैन लगाने की मांग भी की गई।

अभी इन चारों देशों में अलजज़ीरा के प्रसारण पर रोक लगी हुई है जिससे चैनल की व्यूअरशिप में भारी गिरावट आ गई है और वित्तीय नुकसान ने उसकी की कमर तोड़ दी है। अलजज़ीरा ने युद्धरत क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के दौरान अपने कई पत्रकार खोए लेकिन उसके हौसले हमेशा बुलंद रहे। तमाम आरोपों के बावजूद यह कहना कतई गलत नहीं होगा की अलजज़ीरा अरब देशों में इकलौती स्वतंत्र आवाज़ होने का आभास करवाता है। जहां दुनिया भर में सरकारी मदद से चलने वाले चैनल पिंजरे को तोड़ने का साहस नहीं दिखा पाते वहीं अलजज़ीरा ने सरकारी चैनल होने के बावजूद दुनिया के सामने अरब पेनिसुला के एक नए पक्ष को दुनिया के सामने रखा जो अब तक दुनिया अमेरिकी और ब्रिटश चैनलों के चश्मे से देखती आई थी। दुनिया भर में पत्रकारों पर हो रहे हमले और प्रेस पर नियंत्रण की कोशिशों का अलजज़ीरा विरोध करता रहा है। भारत में जब मोदी सरकार द्वारा मीडिया पर नियंत्रण की कोशिश की गई तब अलजज़ीरा ने अपनी वेबसाईट पर इसकी कड़ी निंदा की थी।

तमाम विपरीत परिस्थितियों और विवादों का सामना करते हुए अलजज़ीरा अंधेरे में एक चिराग की तरह चमक रहा है।

 

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Copyright © All rights reserved. Newsphere by AF themes.