दिल्ली हिंसा: 85 वर्षीय अकबरी को ज़िंदा जलाने वाले हैवान गिरफ्तार

delhi violence : 85 year old elderly woman akbari burnt alive fire at home bhajanpura's gamri village
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Ground Report | New Delhi

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में पिछले महीने हुई हिंसा के दौरान 85 वर्षीय एक महिला के मकान को आग के हवाले कर कथित तौर पर उसकी हत्या करने को लेकर दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों, अरूण  और वरूण को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 11 मार्च को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान वीडियो क्लिपिंग और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर की गई। पुलिस ने बताया कि 25 फरवरी को भीड़ द्वारा महिला के मकान को आग के हवाले कर दिये जाने पर वह उसके अंदर फंस गई। दमकल विभाग द्वारा आग पर काबू पाये जाने के बाद करीब 10 घंटे बाद उसका शव बरामद किया जा सका। उसकी मौत दम घुटने से हुई।

आपको बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके के गामड़ी गांव की रहने वाली 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला अकबरी देवी की भी दंगों में दर्दनाक मौत हो गई थी । उनका बेटा दूध लेने बाहर दुकान गया था लेकिन अचानक भड़की हिंसा में किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। झुंड में आए दंगाइयों ने घर को आग के हवाले कर दिया। अकबरी देवी ठीक से चल भी नहीं सकती थी भागना तो दूर की बात। इस पूरे घटनाक्रम की आपबीती बताते हुए बुजुर्ग महिला के बेटे सैयद सलमानी ने हिन्दी न्यूज़ चैनल एडटीवी से बातचीत में बताया था कि, मैं दूध लेने बाहर गया था। पड़ोस में दूध खत्म हो चुका था। आखरी गली में दूध लेने पहुंचा ही था कि बेटे का फोन आया कि करीब सौ-डेढ़ सो लोगों की भीड़ घर के सामने हैं और मैन गेट तोड़ रही है। मैं भागे-भागे आया लेकिन रास्ते में मुझे रोक लिया गया और कहा कि वहां मत जाओ नहीं तो तुम्हें भी मार डालेंगे।

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दंगाईयों ने मेन गेट तोड़ दिया। घर में घुसकर भी तोड़-फोड़ की और घर को आग के हवाले कर दिया। माँ ऊपर वाले फ्लोर भी आग भड़की तो ऊपर भी पहुंची। घटना मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे के आसपास घटी लेकिन इलाके में फैले तनाव के चलते दमकर कर्मियों ने माँ का शव रात करीब साढ़े नौ बजे निकाला। उनका एक हाथ जल चुका था। जलने और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। सलमानी मदद के लिए आवाज़ देते रहे मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। वो दूर सड़क से खड़े होकर इस मंज़र को देख रहे थे लेकिन तनाव के चलते लोग उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहे थे। सलमानी कहते हैं कि दंगों में मैंने अपनी माँ को खोया है कोई और दंगे में अपना परिवार न खोए, हिन्दू-मुसलमान एक होकर रहे हैं।

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