Life of Ajit Jogi

अजीत जोगी का निधन, राजीव गांधी से मिलने के बाद बदल गई थी जोगी की किस्मत

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Ground Report | News Desk

छ्त्तीसगढ़ के प्रथंंम मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi Death) ने रायपुर के नारायणा अस्पताल में आखिरी सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे। उन्हें हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनकी उम्र 74 वर्ष थी।

अजीत जोगी छ्त्तीसगढ़ की राजनीति के अहम किरदार थे। उनका राजनीतिक जीवन काफी आकर्षक रहा। बचपन में अजीत जोगी नंगे पैर स्कूल जाया करते थे। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन पढ़ाई में रुचि और उनकी मेधा उन्हें भोपाल ले आई जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और गोल्ड मैडल भी हासिल किया। इंजीनियरिंग करने के बाद जोगी प्रशासनिक सेवा में आ गए। उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर, ग्वालियर, सीधी, शहडोल और रायुपर में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इन शहरों के प्रशासनिक मुखिया के तौर पर अजीत जोगी ने खूब राजनीतिक अनुभव हासिल किया। इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की उनपर नज़र पड़ी।  जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, उस समय अजीत जोगी इंदौर के कलेक्टर थे। इसी समय अर्जुन सिंह की सिफारिश और राजीव गांधी के कहने पर जोगी ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा पहुंच गए। इसमें छत्तीसगढ़ के चर्चित नेता विद्याचरण शुक्ल और माधवराव सिंधिया ने भी उनकी मदद की। ऐसे जोगी का राजनैतिक सफर शुरु हुआ।

साल 2000 में अजीत जोगी ने नवनिर्मित राज्य छ्त्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे आदिवासी बहुल राज्य छ्त्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस में अजीत जोगी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। अजीत जोगी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहे। जून 2007 में जोगी के बेटे को एनसीपी नेता के कत्ल की इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया गया था। बाद में सीबीआई ने उन्हें इस केस से बरी कर दिया था। कांग्रेस पर जोगी के केस को खत्म करवाने के लिए सीबीआई के दुरुपयोग का इल्ज़ाम लगा। अजीत जोगी पर पर अपने आदिवासी होने के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप भी लगा। पार्टी विरोधी गतिविधी के आरोप के बाद जोगी को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। फिर अजीत जोगी ने खुद की पार्टी बनाई और छ्त्तीसगढ़ को एक विकल्प प्रदान किया। 2018 के चुनावों में अजित जोगी ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को चुनौती दी। नई पार्टी वह कमाल नहीं दिखा पाई जिसकी अजीत जोगी को उम्मीद थी। कांग्रेस ने चुनावों में विजय हासिल की और भूपेश भघेल राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। अजीत जोगी का नाम छ्त्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा याद किया जाएगा।

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