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PhD Scholar Sonia Dabas Case: सोनिया डबास उतरा AIRSA, शुरू किया #stop_harresing_resarchers कैंपेन

AIIMS doctor raped by senior during birthday party
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GJU के पीएचडी विभाग की रिसर्चर सोनिया डबास ने अवैध संबंध बनाने के दवाब के कारण प्रशासन से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। जिसके बाद उनके परिजन ने मामले की जांच की मांग की है। वहीं पीएचडी छात्रा सोनिया डबास की सपोर्ट में AIRSA (all India research scholar’s association) सामने आया है और उसने इस मामले में कई सवाल उठाए हैं कि कब तक रिसर्चर छात्र आत्महत्या का शिकार होते रहेंगे? क्यों उन्हें परेशान किया जाता है? कभी तंग हाली के चलते तो कभी यौन शोषण के चलते पीएचडी स्कॉल दबाव में आत्महत्या कर लेते हैं।

AIRSA ने कहा कि, इस तरह देश के अलग-अलग रिसर्च ऑर्गनाइजेशन में आत्महत्या और यौन शोषण के बहुत मामले  सामने आ रहे हैं और लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।  हर साल देश के रिसर्च ऑर्गनाइजेशन में छात्र किसी ना किसी मजबूरी के कारण आत्महत्या कर लेते हैं। अब फिर वो प्रोफेसर के बेवजह दबाब के कारण हो या और किसी कारणों से।

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AIRSA ने रिसर्चर छात्रों के लिए क्या कहा

AIRSA ने कहा कि, अगर रिसर्चर इन सभी समस्याओं से घिरा रहेगा तो उसका मन रिसर्च में नहीं लगेगा और वह किसी भी तरह की रिसर्च नहीं कर पायेगा। अगर ऐसे ही चलता रहा तो रिसर्चरों को स्वस्थ और अच्छा वातावरण नहीं मिल पायेगा जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ेगा।

छात्रों को उनके रिसर्च सम्बन्धी कार्यों के लिए सही समय पर सभी जरुरी सुविधाएं जैसे उपकरण, कैमिकल और छात्रवृति नहीं मिलने से उनका लगातार शोध पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है। रिसर्चर भी बाकी लोगों के  समान ही खुद अपने परिवार, समाज और देश की प्रगति और निर्माण में अपना योगदान देते हैं। रिसर्च एक प्रोसेस है, और इसमें समय भी लगता है। इसमें रिसर्चर छात्रों की दिन और रात की मेहनत होती है और इसके अलावा छात्रों को मानसिक और शारीरिक, फाइनेंशियल और यौन शोषण झेलना पड़ता है।

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AIRSA ने इसके खिलाफ क्या कदम उठाये

आल इंडिया रिसर्च स्कोलर्स एसोसिएशन” को जब सोनिया डबास की आत्महत्या की खबर मिली तो एसोसिएशन ने देश के सभी ऑर्गनाइजेशन के रिसर्च छात्रों को जागरूक करने के लिये सोशल मीडिया के मध्यम से सोनिया डबास के आत्महत्या के मामले से अवगत कराया और इस पर एक फेसबुक मे लाईव चर्चा भी की ।

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उन्होंने कहा कि हम आत्महत्या के मामलों को लेकर पहले भी देश के उस विभाग के उच्च अधिकारियो और मन्त्रियों को इस बारे में बता चुके हैं। इसकी सुव्यवस्थित ढंग से जाँच-पडताल होनी चाहिये थी। इस बारे मे माँग भी कर चुके हैं, मगर सरकार और अन्य उच्च अधिकारियों की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई ।

कौन सी माँगे रखी ऑल इंडिया रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ने

ऑल इंडिया रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ने मांग रखी कि पीयू घोष रिसर्च छात्रा आई आई टी गाँधीनगर और सोनिया डबास रिसर्च छात्रा ने हिसार के गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में आत्महत्या के मामलों को लेकर सी.बी.आई की तरफ से निष्पक्ष जाँच की जाये। दोषियों को सजा मिले।  सरकार से भी यह निवेदन करते है कि रिसर्च के क्षेत्र में ऐसे कानून बनाये जाएं  जिससे इस तरह की घटनाएँ कम हो सके।

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हमारे देश के वैज्ञानिकों ने कोरोना की वैक्सीन की खोज की। जो कोविक्सिन वैक्सीन के नाम से देश के साथ-साथ विदेशों मे भी प्रचलित और कारगार साबित हुई है। हमे भारतीय वैज्ञानिकों पर गर्व होना चाहिए। इसी तरह हमारे रिसर्च छात्र भी देश और समाज के लिये अपनी रिसर्च के माध्यम से योगदान कर रहें है।

#Stop_harassing_researchers के नाम से शुरू किया कैम्पेन

AIRSA ने ट्विटर के माध्यंम से सोनिया डबास को न्याय दिलाने के लिए #Stop_harassing_researchers नाम से कम्पैंन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार जल्दी से जल्दी हमारे साथ जुड़े और इसका उचित हल निकाले। अगर हम देश मे अच्छी रिसर्च चाहते है तो हमे वैज्ञानिक समुदाय के साथ हो रहे इस प्रकार के घिनौने काम और अत्याचार को बन्द करना होगा। इसके साथ-साथ हमारे रिसर्च छात्रों को छात्रवृति भी समय पर दी जानी चाहिए। जिससे रिसर्च छात्रों को  रिसर्च के समय परेशान ना होना पड़े।

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