KERALA FLOOD: केरल में बाढ़ से अरबों रुपए की फसल तबाह

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तिरुअनंतपुर, 22 अगस्त। केरल में आई सदी की सबसे बड़ी बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतरने लगा है। इसके साथ ही तबाही के आंकड़े सामने आने लगे हैं, केरल को इस त्रासदी से हुई तबाही से उबरने में बहुत समय लग जाएगा। सबसे ज़्यादा नुकसान राज्य के अन्नदाता किसान को हुआ है। जिनके मेहनत से उगाये बाग-बगीचे और खेत-खलिहान बाढ़ में तबाह हो गए।

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प्रारंभिक आंकलन के मुताबिक राज्य के 280,442 किसानों को करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान हुआ है। 45,988 हेक्टेयर ज़मीन पर लगाई गई फसल बुरी तरह बर्बाद हो गई। 1 लाख के करीब गाय, 4 लाख मुर्गियां, 1 लाख सूअर और 1 लाख से ज़्यादा भेड़ें पानी में बह गई।

केरल में मुख्यतः धान, रबर, काली मिर्च, इलाइची, चाय, नारियल और फलों की खेती की जाती है। रबर और इलाइची का केरल सबसे बड़ा उत्पादक है। काली मिर्च की 70-80% फसल फूल गिर जाने के कारण नष्ट हो चुकी है।

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45 हज़ार एकड़ में चावल, 23 हज़ार एकड़ में सागो, 1500 एकड़ में धान, 1300 एकड़ में नारियल और 10 हज़ार एकड़ में लगाई गई सब्ज़ी की फसल पानी मे बह गई।

करीब 75 हज़ार काली मिर्च के बाग, 27 हज़ार रबर के पेड़ और 1200 कोको के पौधे बाढ़ में नष्ट हुए हैं। केरल की कुल आमदनी का 20 फीसदी हिस्सा खेती से ही आता है। ऐसे में यह नुकसान राज्य को बहुत पीछे धकेल देगा।

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राज्य को बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के कार्यों को शुरू करना होगा जिसमें केंद्र द्वारा दी गयी 500 करोड़ की राशि पर्याप्त नहीं होगी। अभी जो भी रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा हो रही है उससे केवल फौरी राहत और बचाव का काम हो पाएगा।

हालात सामान्य होने के बाद केंद्र के साथ मिलकर नुकसान का आंकलन किया जाएगा उसके बाद केंद्र की तरफ से राज्य को विशेष पैकेज दिया जा सकता है। किसानों को उनकी फसल के नुकसान का मुआवज़ा भी सरकार को देना होगा।

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