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राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद यूपी में लव जिहाद का क़ानून लागू, जान लें ये मुख्य बातें

लव जिहाद का क़ानून
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‘लव जिहाद’ ये शब्द आपने पहली बार कब सुना या पढ़ा होगा? वर्तमान समय में इस शब्द को सुनने या पढ़ने के बाद आप क्या सोचते और समझते हैं? अगर आप इस शब्द को लेकर पड़ताल करेंगे तो पाएंगे कि भारत में 2014 से पहले पढ़ने और सुनने में बिल्कुल न के बराबर ही मिलेगा। इक्का-दुक्का हिंदुत्व संगठन या मीडिया पर होने वाली चर्चा में लव जिहाद जैसे शब्द चर्चा का हिस्सा बनते थे।

वर्तमान में हर आमजन की ज़ुबान से ये शब्द सुनने को मिल जाएगा या इस पर लोगों के बीच बहस होती नज़र आएगी। राजनीति की कोख से जन्मे इस शब्द को पाल-पोस कर हर एक की ज़ुबान तक पहुंचाने में भारतीय मीडिया ने सबसे अहम रोल अदा किया है। मीडिया इस शब्द की परवरिश से ही देश में एक समुदाय के प्रति नफरत फैलाने के लिय करती रही है। आज उसका असर ये हुआ कि लोग इस शब्द को सुनते ही एक समुदाय को बुरा भला करते हैं। यहां तक कि लोग हिंसा पर भी उतर आते हैं।

क्या भारत में ‘लव-जिहाद’ के ख़िलाफ क़ानून संभव है, क्या कहता है संविधान?

वर्तमान समय में देश में लव जिहाद का मुद्दा चर्चा का बिंदू बना हुआ है। कई बीजेपी शासित राज्य इस पर कानून बनाने जा रहे है, लेकिन उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जिसनें लव जिहाद के ख़िलाफ अध्यादेश को मंज़ूरी दी और राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद यूपी में लव जिहाद का क़ानून प्रभावी हो गया है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विधानसभा उपचुनाव के दौरान ऐलान किया था कि प्रदेश में लव जिहाद को लेकर एक कानून लाया जाएगा। यूपी की कैबिनेट ने 24 नवंबर को “गैर कानूनी धर्मांतरण विधेयक” को मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि इस कानून का मक़सद महिलाओं को सुरक्षा देना है।

इसके साथ ही इस मुद्दे पर जमकर राजनीति भी हो रही है। इसके साथ पहले मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद पर कानून लाने की तैयारी कर चुकी है। हरियाणा, कर्नाटक औऱ कई अन्य BJP शासित राज्यों में भी लव जिहाद पर कानून लाने की कवायद चल रही है। वहीं यूपी में राज्यपाल ने गैर कानूनी तरीके से धर्मांतरण पर रोक से जुड़े अध्यादेश UP Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Ordinance 2020) को शनिवार को मंजूरी दे दी। अब क़ानून पूरी तरीक़े से प्रदेश में प्रभावी हो गया है।

इस क़ानून से जुड़ी कुछ मुख्य बातें

  • अध्यादेश में ये भी कहा गया है कि अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे DM को 2 महीने पहले सूचना देनी होगी । ऐसा नही करने पर 10 रुपए जुर्मानें के 6 महीने से 3 साल की सजा।
  • कोई महिला जो SC \ ST कैटेगरी में आती है उसका झूठ बोलकर या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 25 हजार जुर्मानें के साथ 3 से 10 साल की सजा ।  लव जिहाद के मामले में मदद करने वाला भी मुख्य आरोपी बनाया जाएगा
  • लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश में कहा गया है कि झूठ बोलकर, गुमराह कर, लालच देकर या फिर शादी या दबाव देकर धर्म परिवर्तन का दोषी साबित होने पर 15 जुर्माने के साथ 1 से 5 साल की सज़ा
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलें में भी 50 हजार जुर्मानें के साथ 3 से 10 साल की सज़ा । धर्म परिवर्तन के लिए होने वाली शादियां भी इस अध्यादेश के दायरे में है और दोषी पाये जाने पर 1 से 10 साल की सज़ा

लव जिहाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद को लेकर मचे धमासान के बीच इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय ने एक अहम फैसले में कहा कि ‘जीवनसाथी चुनने का अधिकार संवैधानिक है और यह जीवन और निजी स्‍वतंत्रता के अधिकार में निहित है।’

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  • अदालत ने कहा कि बालिग होने पर अपने आप जीवनसाथी चुनने का अधिकार मिल जाता है। अगर यह अधिकार न दिया जाए तो इससे न सिर्फ अमुक व्‍यक्ति के मानवाधिकार का उल्‍लंघन होगा, बल्कि अनुच्‍छेद 21 के तहत मिले जीवन और निजी स्‍वतंत्रता के अधिकार का भी।
  • हाई कोर्ट के जजों ने केएस पुतास्‍वामी बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नज़ीर बनाया जिसमें कहा गया था कि ‘व्‍यक्ति की स्‍वायत्‍ता उसके अपने जीवन से जुड़े अहम फैसले करने की योग्‍यता है।’
  • अदालत ने कहा है कि व्‍यस्‍क होने पर व्‍यक्ति को यह अधिकार मिल जाता है कि वह अपना जीवनसाथी खुद चुन सके। अगर इस अधिकार से उसे वंचित किया जाएगा तो यह उस व्‍यक्ति के जीवन और निजी स्‍वतंत्रता के अधिकार का उल्‍लंघन होगा क्‍योंकि यह संविधान के अनुच्‍छेद 21 के तहत मिले मनपसंद जीवनसाथी चुनने के अधिकार के खिलाफ है।

लव जिहाद पर क्यों बढ़ता जा रहा विवाद ?

देशभर में इस मुद्दे को लेकर राजनीति बढ़ती ही जा रही है। कुछ हिंदू संगठन इस पर मरने-मारने पर उतारूं हैं। अब इस मुद्दे पर क़ानून बनाने की बात की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर क़ानून बनाने में कामयाब हो गए हैं।

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देश के अन्य राज्य भी लव जिहाद के मसले पह क़ानून बनाने की बात की लगातार कहते आ रहे हैं। हालही में दिल्ली से सटे हरियाणा में एक लड़की की गोली मार कर हत्या के बाद इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। जस्टिस एससी त्रिपाठी ने प्रियांशी उर्फ समरीन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नूरजहां बेगम केस के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है।

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