JNU के बाद अब AIIMS की फीस बढ़ाने की तैयारी में मोदी सरकार

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Ground Report News Desk | New Delhi

नई दिल्ली स्थित JNU जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोत्तरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि वहीं अब खबर है कि मोदी सरकार AIIMS में फीस बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि, वह अपने मरीजों के लिए यूजर चार्जेज की समीक्षा कर एक मॉडल सूची तैयार करें, जिसे देश के बाकी एम्स में भी जारी किया जा सकें।

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय का यह आदेश ऐसे समय जारी हुआ है जब फीस बढ़ने के खिलाफ जेएनयू छात्र सड़कों पर मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम्स के बेहतर संचालन के लिए गठित केंद्रीय इंस्टिट्यूट बॉडी ने मेडिकल एजुकेशन और मरीजों के इलाज के शुल्क की समीक्षा करने का फैसला किया है। इस फैसले के चलते आने वाले दिनों में एम्स में एमबीबीएस और पीजी की ट्यूशन फीस बढ़ना तय माना जा रहा है।

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वहीं इस बात की भी खबर है कि एम्स में इलाज का खर्च एक समान तय करने की योजना बनाई जा रही है, जिसके चलते यहां इलाज का खर्च बढ़ जाएगा। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स ने मोदी सरकार के इस नए फरमान का विरोध शुरू कर दिया है।

इस पूरे मामले में एम्स की SYS सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट के चेयरमेन लाल चंद्र विश्वकर्मा ने ग्राउंड रिपोर्ट से बातचीत में कहा कि, देश में शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है। शिक्षा हर एक वर्ग के लोगों की पहुंच में होना चाहिए। कोई गरीब छात्र सिर्फ पैसों के अभावों में वंचित न हो जाए इसलिए सरकार को सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, अगर AIIMS में स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स की फीस बढ़ाई जाती है तो हमें भी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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वहीं एम्स छात्र संगठन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि, रेजिडेंट डॉक्टर्स असोसिएशन (आरडीए) ने एम्स प्रशासन से मांग की है कि शुल्क की समीक्षा के दौरान रेजिडेंट डॉक्टरों और एमबीबीएस के छात्रों से भी बातचीत की जानी चाहिए। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि इस मामले में हम नजर बनाए हुए हैं अगर फीस में जरूरत से ज्यादा वृद्धि होगी तो जेएनयू की तरह एम्स द्वारा भी विरोध किया जाएगा।

इससे पहले एम्स ने 20 नवंबर को एक आदेश जारी कर कहा था कि, केंद्र सरकार ने ट्यूशन फीस और इलाज के शुल्क की समीक्षा करने के लिए कहा है। सभी विभागों से 25 नवंबर तक मौजूदा शुल्क का डाटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।