AFSPA : असम में अफ्सपा 6 महीने के लिए बढ़ाया गया, जानिए अफ्सपा के बारे में सबकुछ

AFSPA : असम में अफ्सपा 6 महीने के लिए बढ़ाया गया, जानिए अफ्सपा के बारे में सबकुछ

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असम सरकार ने राज्य में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम, 1958 (AFSPA) की अवधि फिर छह महीने के लिए बढ़ा दी गई है, जो 28 अगस्त से प्रभावी होगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि असम को हाल ही में पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों पर हुए उग्रवादी हमलों और विभिन्न हिस्सों से अवैध हथियार और विस्फोटक बरामद होने के कारण अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है।

क्या है ये AFSPA क़ानून ?

भारतीय संसद ने 61 वर्ष पूर्व आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 “अफस्पा” को पारित किया था । यह सैनिक क़ानून है, जिसे अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है। इस क़ानून के माध्यम से सेना को कुछ विशेष अधिकार प्रदान किये जाते है। आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट ‘अफस्पा’ को 1 सितंबर 1958 को भारतीय राज्य असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड में लागू किया गया था।

AFSPA क़ानून का पूरा नाम आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट है। इस क़ानून के अंतर्गत सेना को विशेष अधिकार प्रदान किये जाते है, जिसके अंतर्गत सेना देश की सुरक्षा उचित ढंग से करनें सहायता प्राप्त होती है। अशांत क्षेत्रों में सेना का यह बहुत बड़ा हथियार है, इसकी सहायता से राज्य सरकार सेना के किसी भी कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। इसी क़ानून की सहायता से भारत की सीमाओं पर आतंकवादियों को समाप्त किया जाता है। यह भारत की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे सैनिकों का एक कानूनी सुरक्षा कवच है।

अफस्पा की आलोचना क्यों ?

पिछले कुछ वर्षों में अफस्पा की काफी आलोचना हुई है । 31 मार्च, 2012 को संयुक्त राष्ट्र ने भारत से कहा था कि लोकतंत्र में अफस्पा का कोई स्थान नहीं है इसलिए इसको रद्द कर दिया जाए। ह्मयूम राइट्स वॉच ने भी इसकी लगातार आलोचना करता रहा है। अफस्पा पर मानवाधिकार संगठन, अलगाववादी और राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि इस कानून से मौलिक अधिकारों का हनन होता है। इस कानून के कुछ सेक्शन पर भी विवाद है।

कब और कहाँ लागू हुआ अफ्स्पा ?

1 सितंबर 1958 को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित भारत के उत्तर-पूर्व में AFSPA को लागू किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य तत्कालीन हिंसा को रोकना और क्षेत्र में शांति की स्थापना करना है। बाद में पंजाब और चंडीगढ़ में भी इस अधिनियम को लागू कर दिया गया जिसे बाद में वापस ले लिए गया इसके बाद 1990 में जम्मू और कश्मीर राज्य में अफ्स्पा को लागू कर दिया गया।

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इस अधिनियम के द्वारा सेना यदि किसी व्यक्ति को क़ानून के विपरीत कार्य करते हुए पाया जाता है, तो उस पर शारीरिक बल या गोली का प्रयोग कर सकती है। सेना इस अधिनियम की सहायता से आतंकियों के अड्डे और प्रशिक्षण शिविरों को भी तबाह कर सकती हैं। शक के आधार पर सेना किसी भी स्थान पर तलाशी अभियान चला सकती है, और यदि कोई वस्तु या व्यक्ति संदिग्त अवस्था में पाया जाता है, जो देश की सुरक्षा को हानि पंहुचा सकता है, उसके विरुद्ध सेना बल और गोली का प्रयोग कर सकती है।इस अधिनियम के तहत सेना पर कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।

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