गेहूं स्टोर करने के नाम पर कैसे अडानी बना रहा करोड़ों, समझिए..

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अडानी एग्री लोजिस्टिक के मुताबिक़ अड़ानी के पास फ़िलहाल देश में 28 सिलो हैं। कोई सिलो कहता है तो कोई साइलोज। इनमें बड़े पैमाने पर गेहूं को स्टोर किया जाता है। इन 28 साइलोज में से 14 साइलोज वर्किंग है यानि इनमें गेहूं रखा हुआ है। जिसका अच्छा ख़ासा किराया अडानी को चुकाया जाता है उसकी बात बाद में करेंगे।

अड़ानी के इन 14 साइलोज में गेहूं की स्टोरेज क्षमता है = 8 लाख 75 हजार टन

इन 14 साइलोज में से – फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ अड़ानी का करार = 8 साइलोज

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सरकार-अडानी की मिलीभगत, एक और बड़ा घोटाला !


मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग एण्ड लाजिस्टिक्स कार्पोरेशन के साथ करार = 7 साइलोज

बाकि बचे हुए 14 साइलोज अड़ानी तेज़ी से देश में बना रहा है जिसकी क्षमता है= 7 लाख टन

गौर करने वाली बात –


अडानी के 7 सिलो साल 2007 में बनकर तैयार हुए जिसमें FCI के साथ 20 साल तक अच्छी खांसी क़ीमत पर गेहूं रखने का करार हुआ । जिसका किराया FCI ने अडानी को दिया और दे रहा है।

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21 साइलोज के करार मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए जिसमें 20 साल की बजाय करार की समय सीमा बढ़ाकर 30 साल कर दी गई । यानि 30 सालों तक जिस भी सरकार या फ़ूड कॉरपोरेशन के साथ अड़ानी का करार हुआ है, उनकी गेहूं को अडानी अपने सिलो में स्टोर करेगा और उनसे किराया लेगा। और ये किराया करोड़ों में है।

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लेख पत्रकार Abhinav Goel की वॉल से लिया गया है..

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