कौन हैं कवि वरवर राव और क्यों हैं जेल में बंद ?

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मीडिया से बात करते हुए वरवर राव की पत्नी ने कहा कि-

‘हमारे लिए अभी उनका जीवन सबसे बड़ी चिंता का विषय है। हमारी वर्तमान मांग उनका जीवन बचाने की है। हम सरकार से उन्हें बेहतर अस्पताल में स्थानांतरित करने या हमें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की अनुमति देने की मांग करते हैं। हम सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि उसे किसी भी व्यक्ति को जीवन के अधिकार से वंचित करने का कोई अधिकार नहीं है, एक विचाराधीन कैदी का भी नहीं।’

कौन हैं कवि वरवर राव और किस जुर्म के चलते जेल में हैं बंद ?

वरवर राव एक तेलुगु वामपंथी कवि और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वे अपनी कविताओं के चलते जाने जाते हैं। राव ने 1957 में लेखन की शुरूआत की थी। शुरूआती लेखन से ही राव कविताएं लिखते रहे हैं। उन्हें तेलुगू साहित्य का एक प्रमुख मार्क्सवादी आलोचक भी माना जाता है। राव दशकों तक इस विषय पर तमाम छात्रों को पढ़ाते रहे हैं। वे पाँच दशकों से तेलुगु के एक बेहतरीन वक्ता और लेखक रहे हैं, चार दशकों तक तेलुगु के शिक्षक रहे हैं और अपनी तीक्ष्ण स्मृति के लिए जाने जाते हैं।

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साल 1986 के रामनगर साजिश कांड सहित कई अलग-अलग मामलों में 1975 और 1986 के बीच उन्हें कई बार गिरफ्तार और फिर रिहा किया गया। उसके बाद 2003 में उन्हें रामवगर साजिश कांड में बरी किया गया और 2005 में फिर जेल भेज दिया गया। उनके ऊपर माओवादियों से कथित तौर पर संबंध होने के भी आरोप लगते रहे हैं। राव, वीरासम (क्रांतिकारी लेखक संगठन) के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं।

अभी वरवर राव जेल में क्यों बंद हैं ?

वर्तमान में राव भीमा कोरेगांव में हुई घटना के चलते बंद हैं। बात एक 1 जनवरी, 2018 की है। पुणे के नजदीक भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरा होने के मौके पर 200वीं सालगिरह को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जा रहा था। दलित समुदाय के लगभग 5 लाख से अधिक लोग शौर्य दिवस मनाने के लिए वहां एकत्र हुए थे। तब ही इस कार्यक्रम के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस हिंसक झड़प के दौरान एक शख्स की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हुए थे।

क्यों भड़की थी हिंसा?

दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से वाड़ा में कई जनसभाएं की थीं। जनसभा में अधिकतर मुद्दे हिन्दुत्व राजनीति के खिलाफ थे। इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी। भाषण देने वालों में गौतम नवलखा, वरवर राव समेत कई अन्य बुद्धिजीवी थे। हिन्दुत्व राजनीति के खिलाफ हो रहे भाषणों के चलते बिगड़ा था माहौल।

हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत के बाद इसकी आंच महाराष्ट्र के 18 जिलों तक फैल गई और इस हिंसा में माओवादियों के हाथ होने की बात सामने आने लगी। जब इस मामले में FIR दर्ज हुआ तो, उसमें हिंसा भड़काने वालों और माओवादी का साथ देने में वरवर राव और अन्य पांच लोगों के नाम शामिल किए गए, जिसमें वर वर राव के अलावा अरुण फेरेरा, वर्नोन गॉनसैल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा शामिल थे। इन सभी को भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में 28 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था।

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वरवर राव पर एक और आरोप है। भीमा कोरेगांव जांच के दौरान पुलिस को एक पत्र हाथ लगा, जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का जिक्र था। हालांकि, राव ने मीडिया से कहा था कि उनका उस पत्र से कोई लेना देना नहीं जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश का उल्लेख है। हालांकि, राव ने स्वीकार किया कि वह गडलिंग और विल्सन को जानते हैं। राव ने कहा था, “मैं इस बात से इनकार नहीं करुंगा कि मैं उन लोगों को नहीं जानता जिन्हें पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।”

वर्तमान में चर्चा में क्यों हैं वर वर राव ?

कहा जा रहा है कि वरवर राव की स्वास्थ्य हालात ठीक नहीं है। वर वर राव 80 साल के हैं और इस समय नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। कवि वरवर राव के परिवार ने रविवार को दावा किया कि उनकी सेहत बिगड़ रही है। वे बातों को समझ नहीं पा रहे हैं और वह बेसुध’ हैं। परिवार ने संबंधित अधिकारियों से उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की अपील की।

वर वर राव के परिवार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है

प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने लिखा है- हम, नवी मुंबई की तलोजा जेल में क़ैद विश्वप्रसिद्ध तेलुगु क्रांतिकारी कवि और जन बुद्धिजीवी, वरवर राव के परिवार के सदस्य, उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित हैं। उनकी स्वास्थ्य की स्थिति छह सप्ताह से अधिक समय से डरावनी बनी हुई है, जब 28 मई 2020 को उन्हें अचेत अवस्था में तलोजा जेल से जेजे अस्पताल में ले जाया गया था। हालाँकि उन्हें तीन बाद ही अस्पताल से छुट्टी देकर वापस जेल भेज दिया गया था, पर उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ है और उन्हें अब भी आपातकालीन चिकित्सीय देखभाल की ज़रूरत है।

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बुद्धिजीवी उनकी रिहाई और ईलाज की बात कर रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि अबतक वर वर राव के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुआ है फिर भी पिछले 22 महीने से जेल में बंद हैं। और कोर्ट की ओर से कोविड 19 के खतरे के बावजूद उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है।

गौरतलब है कि राव 22 महीने से जेल में हैं और उम्र के आधार पर राहत पाने, खराब स्वास्थ्य और कोविड-19 के खतरे जैसे मौकों पर उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

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