पी चिदंबरम ने निर्मला सीतारमण को बताया ईश्वरीय दूत

निर्मला सीतारमण को चिदंबरम ने बताया ‘ईश्वर की दूत’

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हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में आए आर्थिक संकट का ठीकरा कोरोना महामारी पर फोड़ दिया। उन्होंने इसे एक्ट ऑफ गॉड यानी ईश्वर का कृत्य करार दे दिया। इसपर विपक्ष ने उनकी आलोचना यह कह कर करना शुरु कर दी कि देश की अर्थव्यवस्था तो कोरोना महामारी आने के पहले भी चरमरा रही थी। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने निर्मला सीतारमण के एक्ट ऑफ गॉड वाले बयान पर तंज कसते हुए ट्वीट कर लिखा कि-


अगर कोरोना महामारी ईश्वरीय घटना है तो 2017-18 और 2018-19 के बीच अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन की कैसै व्याख्या की जाए। तब तो महामारी भी नहीं थी। क्या ईश्वर की दूत वित्त मंत्री इसका जवाब देने का कष्ट करेंगी?

राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

वित्त मंत्री के एक्ट ऑफ गॉड वाले बयान पर राहुल गांधी ने भी तंज कसते हुए लिखा कि देश की अर्थव्यवस्था तीन कारण से बर्बाद हुई पहला नोटबंदी दूसरा जीएसटी गलत ढंग से लागू करना और तीसरा असफल लॉकडाउन।

कंगाल हुई केंद्र सरकार

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीएसटी बैठक में राज्यों को रिज़र्व बैंक से ऋण लेने के विकल्प को नकारने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी राज्य इसे एक सुर में नकार दें और अपने हिस्से की मांग करें।

आपको बता दें कि जीएसटी बैठक में कहा गया कि लॉकडाउन की वजह से इस बार जीएसटी कलेक्शन कम हुआ है ऐसे में केंद्र राज्यों को उनका हिस्सा दे पाने में सक्षम नहीं है।

राज्यों ने कहा कि अगर जल्द केंद्र सरकार ने उन्हें पैसे नहीं दिये तो उनके पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे भी नहीें बचेंगे। इस स्थिति से निबटने के लिए सरकार ने राज्य सरकारों से रिज़र्व बैंक से ऋण लेने को कहा है जिसे केंद्र सरकार दिलवाने में मदद करेगी।

लेकिन कई राज्यों ने कहा है कि केंद्र सरकार खुद रिज़र्व बैंक से ऋण ले और राज्य सरकारों को दे। अगर कल को राज्य ऋण नहीं चुका पाए तो उनके लिए मुसीबत होगी।

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