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क्या इंडियन सेक्यूलर फ्रंट लगा पाएगा बंगाल के मुस्लिम वोटों में सेंध?

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पश्चिम बंगाल का चुनाव दिन प्रतिदिन दिलचस्प होता जा रहा है। इस बार बीजेपी राज्य में पूरे दम खम के साथ चुनाव लड़ रही है, तो वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अपना गढ़ बचाने के लिए एड़ी चोटी का दम लगा रही हैं वहीं कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां चुनाव से नदारद ही दिखाई दे रही हैं। लेकिन इन सब के बीच एक तीसरा मोर्चा बंगाल में उभर रहा है जो राज्य के मुस्लिम वोटों को अपने साथ करने के प्रयास में खड़ा हो रहा है। पश्चिम बंगाल के फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने आगामी विधानसभा चुनवों के लिए एक नए राजनीतिक संगठन इंडियन सेक्यूलर फ्रंट की घोषणा कर दी है। यह संगठन राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगा।

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कैसे कामयाब होगा इंडियन सेक्यूलर फ्रंट?

इंडियन सेक्यूलर फ्रंट अपने साथ कई छोटी पार्टियों को साथ लेकर चुनाव लड़ेगा इसमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी शामिल होगी।

इस फ्रंट की नेतृत्व पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ही करेंगे। उनका फुरफुरा शरीफ के आसपास के इलाकों में काफी दबदबा है।

इस संगठन का गठबंधन कांग्रेस और वामदलों के साथ होने की भी संभावना जताई जा रही है।

संगठन की घोषणा करते हुए अब्बास सिद्दीकी ने कहा कि हमने इस पार्टी का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया है कि संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा हो, सभी को सामाजिक न्याय मिले और हम सभी सम्मान के साथ रहें।

अब्बास सिद्दीकी और ओवैसी की मुलाकात से बंगाल की राजनीति में भूचाल क्यों?

फुरफुरा शरीफ
फुरफुरा शरीफ में ओवैसी ने की थी अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात

इंडियन सेक्यूलर फ्रंट से ममता को क्या नुकसान?

इस संगठन के खड़े होने से राज्य के 30 प्रतिशत मुस्लिम वोटों में सेंध लगने की संभावना है जो राज्य में ममता बनर्जी को अबतक बड़ी जीत दिलाती रही है।

बिहार विधानसभा चुनावों में मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत से उत्साहित ओवैसी पश्चिम बंगाल में भी अपनी जड़े जमाना चाहते हैं। यहां वो अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में पार्टी को खड़ा करेंगे।

इस नए फ्रंट से सीधा नुकसान ममता बनर्जी को होता दिखाई दे रहा है। राज्य में हिंदू वोटों को इकट्टा करने में जुटी भाजपा मुस्लिम वोटों के विभाजित होने से फायदे में रह सकती है।

इंडियन सेक्यूलर फ्रंट अगर राज्य में कुछ सीटें भी जीत पाया तो देश में एक नया नैरेटिव सेट हो जाएगा की अब मुस्लिम मतदाता केवल मुस्लिम संगठनों को ही वोट करने में सहज महसूस कर रहा है।

कौन हैं अब्बास सिद्दीकी?

अब्बास सिद्दीकी बंगाल के प्रभावशाली मुस्लिम नेता है। पिछले कुछ समय में वो ममता बनर्जी के मुखर विरोधियों के रुप में उभरे हैं। सिद्दीकी के अनुयायी पूरे दक्षिण बंगाल में फैले हुए हैं। बंगाल में 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता है जो 90 विधानसभा सीटों पर नतीजे प्रभावित कर सकते हैं। सिद्दीकी करीब 45 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों को विभाजित करने में सिद्दीकी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

बंगाल में मुस्लिम वोटों का गणित

बंगाल की मुस्लिम आबादी 2011 की जनगणना के दौरान 27.01% थी और अब बढ़कर लगभग 30% होने का अनुमान है। मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद (66.28%), मालदा (51.27%), उत्तर दिनाजपुर (49.92%), दक्षिण 24 परगना (35.57%), और बीरभूम (37.06%) जिलों में केंद्रित है। दार्जिलिंग, पुरुलिया और बांकुरा में, जहां भाजपा ने पिछले साल लोकसभा सीटें जीती थीं, मुसलमानों की आबादी 10% से भी कम है।

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बंगाल चुनाव से जुड़ी अहम जानकारी

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