Aarey forest : 33% हिस्सों पर वनों का होना ज़रूरी, लेकिन देश के सिर्फ 24.49 % हिस्सों में वनों की उपस्थिति

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मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो कार शेड बनाने के लिए तकरीबन 2700 पेड़ काटने की कोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद पेड़ों की कटाई का काम चालू हो गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी को जंगल घोषित करने वाली सभी याचिकाओं को जैसे ही ख़ारिज किया उसके महज़ कुछ ही घंटो के भीतर आरे कॉलोनी में शुक्रवार देर रात पेड़ काटने का काम भी शुरू हो गया.

साभार-सोशल मीडिया

पेड़ काटे जाने के विरोध में कई प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच गए. मेट्रो रेल साइट पर जमकर नारेबाजी की. इस बीच पुलिस ने आरे की तरफ जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. आरे कालोनी के आस-पास धारा 144 भी लगा दी गई है.

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए 29 प्रदर्शनकारियों को बोरिवली कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया. साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार के लिए तय कर दी. वहीं, न्यायिक हिरासत में भेजे गए कई प्रदर्शनकारी छात्र हैं, जिनकी सोमवार को परीक्षाएं हैं. लिहाजा ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के लिए अलग से आवेदन दाखिल किया गया है.

साभार-सोशल मीडिया

बीते शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से फैसला आने के बाद रात को नौ बजे से दो घंटे के भीतर एमएमआरसीएल ने इलेक्ट्रिक मशीन से 450 पेड़ों को काट दिया था. हालांकि स्थानीय लोगों द्वारा विरोध के बाद कुछ देर तक इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था. लेकिन बाद में पुलिस की मदद से शनिवार रात नौ बजे तक में आरे कॉलोनी के करीब 2,134 पेड़ों को काट दिया गया.

क्या है आरे कालोनी इतिहास

इस कॉलोनी को ‘आरे मिल्क कॉलोनी’ के नाम से भी जाना जाता है. 3166 एकड़ में फैले इस इलाके को घने जंगल में बदलने की शुरुआत दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सन 1951 में की थी.नेहरू ने उस वक्त पहली बार उस इलाके में एक पौधा लगाकर इस इलाके को हरा-भरा करने की शुरुआत कर दी थी. आगे चलकर स्थानीय लोगों की सहायता से ये कालोनी देखते ही देखते घने जंगल मे तब्दील हो गई.

साभार-सोशल मीडिया

मुंबई शहर का सबसे हरा भरा इलाका इसे कहा जा सकता है. आरे का वन क्षेत्र राजीव गाँधी नेशनल पार्क से सटा हुआ है. नेशनल पार्क से सटे होने के कारण यहां पर कई बार इंसान और जंगली जानवर के बीच संघर्ष देखा गया है.

नियमानुसार कुल क्षेत्र फल के एक तिहाई यानी 33% हिस्सों पर वनों का होना ज़रूरी है. अगर हम अपने देश की बात करें तो वर्तमान में देश के सिर्फ 24.49 % हिस्सों में वनों की उपस्थिति है लेकिन फिर भी हम वनों की कटाई करने पर अड़ें.

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने इस कदम को लेकर ट्विटर पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने लिखा, ‘‘जिस तत्परता से मुंबई मेट्रो के अधिकारी आरे कॉलोनी के इकोसिस्टम को काटने में जुटे हैं, यह बेहद शर्मनाक है. इन अधिकारियों को तो पीओके में तैनात किया जाना चाहिए. इनसे कहा जाना चाहिए कि पेड़ काटने के बजाए आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करो.’’

ठाकरे ने कहा, ‘‘कई पर्यावरणविद और शिवसैनिक इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ाई जा रही है. वनक्षेत्र को काटा जा रहा है. मुंबई मेट्रो हर उस बात को खत्म कर रही है जो भारत ने यूएन में कही थी.’’

राकांपा की सांसद सुप्रिया सुले ने ट्वीट कर कहा, ‘आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर सरकार अड़ियल रवैया अपना रही है. एक ओर जलवायु परिवर्तन पर बात करना और दूसरी ओर रात को चुपचाप पेड़ काटना सही नहीं है. मुख्यमंत्री कार्यालय से मुंबई हरित क्षेत्र को बचाने के लिए सामने आने की बजाय यही करने की उम्मीद थी.’

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरे जंगलों में कटाई को लेकर कहा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा है कि यह जंगल नहीं है. जब दिल्ली में पहले मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जा रहा था, तो उस दौरान भी 20-25 पेड़ काटे जाने थे. तब भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन प्रत्येक पेड़ को काटने के बदले, पांच पेड़ लगाए गए थे.

पर्यावरण मंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली में कुल 271 मेट्रो स्टेशन बने हैं, साथ ही पेड़ क्षेत्र भी बढ़ा है. यही प्रकृति का विकास और संरक्षण है.

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