तो क्या बीजेपी बनना चाहती है आम आदमी पार्टी?

बीजेपी बनना चाहती है आम आदमी पार्टी
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

हाल ही में आम आदमी पार्टी ने अपना बजट पेश किया जिसका नाम देशभक्ति बजट रखा। इस बजट में कई ऐसे प्रावधान और वादे हैं जो अब तक बीजेपी के ही घोषणा पत्र और कार्यशैली में दिखाई देते थे। इस बजट में जो तीन बातें ध्यान खींचती हैं वो हैं स्कूलों में देशभक्ति करिकुलम लागू करना, जिससे बच्चे कट्टर देशभक्त बन सकें, दूसरा पूरी दिल्ली में 500 तिरंगे झंडे लगाने की घोषणा, जिससे लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत हो सके और तीसरी बुज़र्गों के लिए अयोध्या तीर्थ दर्शन की योजना।

इन घोषणाओं के बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी पर सवाल उठाए। इसके जवाब में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जो कहा वह भी अभी तक भाजपा के नेताओं के बयान में दिखाई देता था। दिल्ली में 45 करोड़ रुपए खर्च कर झंडे लगाने का विरोध कांग्रेस ने किया तो मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि “तिरंगा दिल्ली में नहीं लहराएगा तो क्या इस्लामाबाद में लहराएगा”।

सरकार बदले-बदले से क्यों नज़र आ रहे हैं?

आम आदमी पार्टी के बदले तेवर से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उसकी नज़र अब बीजेपी के वोट बैंक पर टिक गई है। आम आदमी पार्टी द्वारा बोले जा रहे देशभक्ति और राम के बोल बीजेपी को भी रास नहीं आ रहे हैं। 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को दिल्ली में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी, इस पर सफाई देते हुए आप ने कहा था कि “रातों रात मुस्लिम वोट कांग्रेस को चला गया”, यानि जिस मुस्लिम वोट से आम आदमी पार्टी को आस थी वह अब उसके पास नहीं रहा। इसलिए हमने देखा कि दिल्ली में हुए सीएए एनआरसी आंदोलन से आप ने दूरी बनाए रखी, साथ ही धारा 370 जैसे कानूनों का भी पार्टी ने समर्थन किया। विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को अपने काम के दम पर जीत हासिल हुई लेकिन उसे हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों से खासी चुनौती भी मिली। देशभक्ति करिकुलम और राम मंदिर की बात करके अब आप खुद को राष्ट्रभक्त पार्टी दिखाना चाहती है ताकि वह दिल्ली के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी आसानी से पैर पसार सके।

READ:  महाकुंभ में भारत सरकार का 'वीडियो कंपटीशन' और देश में कोरोना का तांडव

दूसरे राज्यों में पैर पसारती आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी का जनाधार दूसरे राज्यों में भी बढ़ रहा है। गुजरात के सूरत में हुए स्थानीय चुनावों में आप ने जीत कर सबको चौंका दिया तो वहीं कई राज्यों में हो रहे निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी ने खाता खोला है। किसान आंदोलन का खुल कर समर्थन कर रही आप को हरियाणा और पंजाब में भी अच्छा जनसमर्थन हासिल हो रहा है। आप ने 2022 में होने जा रहे यूपी के विधानसभा चुनावों में भी लड़ने की घोषणा कर दी है। ऐसे में दूसरे राज्यों में उसे जगह बनाने के लिए हिंदू वोटों में सेंध लगाना ही ज़्यादा कारगर नज़र आ रहा है क्योंकि मुस्लिम और पिछड़े समुदाय के वोटों के कई दावेदार हैं।

READ:  'पाकिस्तान भारत को आतंकवाद एक्सपोर्ट करता है और भारत वैक्सीन'

ALSO READ: Delhi MCD By Elections: आप ने जीती 5 में से 4 सीट, बीजेपी खाली हाथ

आप का बीजेपी बनना आसान क्यों?

बीजेपी बनने से मतलब है हिंदुत्व और राष्टवाद की राजनीति। आम आदमी पार्टी आसानी से बीजेपी के वोटों में सेंध लगा सकती है क्योंकि अब तक दिल्ली में केजरीवाल की सरकार ने अच्छा काम किया है उनपर किसी भी तरह की जातिवाद की राजनीति करने का आरोप नहीं है। अब तक उनको मिलने वाले वोट उनके काम के आधार पर मिले हैं। ऐसे में अगर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का तड़का भी पार्टी लगा दे तो उन वोटों को अपने पाले में ला सकती है जो बीजेपी से नाराज़ हैं लेकिन राष्ट्रवाद और हिंदुत्व जैसे मुद्दे उनके लिए अहम हैं। आम आदमी पार्टी इस तरह एक नए विकल्प के तौर पर खुद को पेश कर सकती है।

READ:  GTB अस्पताल में खत्म होने वाली थी ऑक्सीज़न, जानिए कैसे बचाई गई 500 जानें

You can connect with Ground Report on FacebookTwitter and Whatsapp, and mail us at GReport2018@gmail.com to send us your suggestions and writeups.