श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भूख प्यास से दम तोड़ता मज़दूर और फेल होता लॉकडाउन

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  • 9 मई से 27 मई के बीच इन ट्रेनों में करीब 80 लोगों की मौत हुई
  • 840 स्पेशल ट्रेनों से करीब 50 लाख प्रवासी मजदूर अपने घर पहुंचे
  • 80 फीसदी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार पहुंची
  • 1 मई से 8 मई तक के आंकड़े उपलब्ध नहीं

कोरोना वायरस के संक्रमण को व्यापक स्तर पर फैसने से रोकने के लिए सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला लिया था मगर लगभग 3 महीनों से लगा ये देशव्यापी लॉकडाउन सफल होता दिख नहीं रहा है । स्वास्थ मंत्रालय की साइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, देश में कोरोना मरीजों की संख्या 1,73,763 तक पहुंच गई है। देशभर में अभी 86,422 सक्रिय मामले हैं, जबकि 82,370 मरीज ठीक हो चुके हैं। भारत में कोरोना वायस से मरने वाले लोगों का कुल आंकड़ा 4,971 तक पहुंच चुका है।

लॉकडाउन देशभर के प्रवासी मज़दूरों के लिय कोरोना से भी अधिक घातक साबित हुआ । देश के ग़रीब वर्ग को ध्यान में न रखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला इस वर्ग के लिय सबसे पीड़ादायक बन गया । देश भर में लॉकडाउन के कारण अब तक लगभग 400 लोग अपनी जान गवां चुके हैं । शहरों में लावारिसों की तरह मरने के लिए छोड़ दिए गए ये ग़रीब मज़दूर आज पैदल ही हज़ारों किलोमीटर का सफर तय कर अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं ।

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सरकार पर दबाव बढ़ा तो रेल मंत्रालय ने उनको पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने शुरू कीं । लेकिन इन ट्रेनों में भी प्रवासी मजदूरों की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। ट्रन भी उनकी मौत का कारण बन गई । मिले आंकड़ों की मानें तो श्रमिक स्पेशल में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। ये मौतें 9 से 27 मई के बीच हुई हैं। मिली जानकारी के मुताबिक 23 मई को 10 मौत, 24 मई को 9 मौत, 25 मई को 9 मौत, 26 मई को 13 मौत, 27 मई को 8 मौत इनमें से 11 मौतों को लेकर कारण बताए गए हैं। जिनमें पुरानी बीमारी या फिर अचानक बीमार पड़ने का हवाला दिया गया है।

रेलवे ने ट्रेनों में करीब 80 लोगों की मौत की पुष्टि की

शुक्रवार को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘किसी की भी मौत बड़ी क्षति है। रेलवे के पास कंट्रोल सिस्टम हैं। इसके तहत अगर ट्रेन में किसी की तबियत खराब होती है तो ट्रेन तुरंत रुक जाती है और मरीज को नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया जाता है। कई ऐसे यात्रियों का इलाज किया गया और कई महिलाओं ने भी बच्चों को जन्म दिया। जहां तक ट्रेन में हुई मौतों का मामला है तो लोकल जोन इसके कारणों की जांच करते हैं। बिना जांच के आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौतें भूख से हुई जबकि ट्रेनों में खाने की कोई कमी नहीं थी। ‘

आरपीएफ के एक अधिकारी ने ट्रेनों में सफर के दौरान करीब 80 लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि इस बारे में शुरुआती सूची बन चुकी है। राज्यों के साथ समन्वय के बाद अंतिम सूची भी जल्दी ही तैयार हो जाएगी। रेलवे के प्रवक्ता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका जवाब दिया था।

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