सात वर्षीय जन्नत की कहानी, जो पिछले दो सालों से डल झील की सफाई कर रही है

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सही ही कहा गया है कि उम्र तो सिर्फ एक नंबर है। अगर हौंसलें बुंलद हो, तो आप किसी भी उम्र में सकरात्मक बदलाव ला सकते है। कश्मीर की सात वर्षीय जन्नत इसका बेहतरीन उदाहरण है। जो पिछले दो सालों से कश्मीर की डल झील की सफाई कर रही है। जन्नत की यह प्रेरणादायी कहानी हैदराबाद के एक स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल है।

प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील अपने मूल आकार 22 वर्ग किलोमीटर से घटकर लगभग 10 वर्ग किलोमीटर रह गई है। जिसके कारण झील की क्षमता भी लगभग 40 प्रतिशत कम हो गई है। पर्यटकों द्वारा गंदगी फैलाने के कारण इस झील के पानी की गुणवत्ता भी गिर गई है।

जन्नत अभी श्रीनगर के लिंटन हॉल पब्लिक स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ रही है, उसने पाँच साल की उम्र में झील को साफ रखने में योगदान देने की ज़िम्मेदारी ली थी।

ग्राउंडरिपोर्ट को दिए इंटरव्यू में जन्नत ने कहा “डल झील की सफाई मैंने अपने पिता तारिक अहमद से प्रेरित होकर की थी। मुझे जो भी पहचान मिल रही है, वह सब मेरे पिता के कारण है. डल झील श्रीनगर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इस झील के पास बनी हजरत बल मस्जिद, इस स्थान की सुंदरता को बढ़ाती है। जब भी मैं नाव से जाती थी, तो मुझे डल झील में बहुत सारा कचरा दिखाई देता था। झील का गंदा पानी देखकर मुझे बुरा लगा और मैनें झील की सफाई में अपने पिता की मदद करने का फैसला किया। मेरे भाई, बहन और पिता सफाई में मेरी बहुत मदद करते हैं। झील की सफाई ही एक वजह है कि मेरा नाम अब पाठ्यक्रमों में आ गया है।”

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इसी के साथ जन्नत ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से झील में कचरा ना फेंकने की अपील करते हुए कहा-
“मैं सभी बच्चों से अनुरोध करती हूँ कि वे भी मेरे साथ मिलकर झील की सफाई करें। और पर्यटकों से झील में कचरा ना फेंकने का अनुरोध करती हूँ।”

जन्नत के पिता तारिक अहमद ने ग्राउंडरिपोर्ट से बात करते हुए कहा “उन्हें हैदराबाद से एक दोस्त का फोन आया, जिसने उन्हें बताया कि उनकी बेटी का नाम स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। वह मेरे लिए गर्व का पल था।”

जन्नत चाहती है कि डल झील को पूरी तरह से साफ किया जाए और अधिक से अधिक पर्यटक बड़ी संख्या में वहाँ आए। जन्नत के पिता कई सालों से इस झील की सफाई करते आ रहे हैं. उन्हें खुशी है कि जन्नत के प्रयासों को दुनिया भर में सराहा जा रहा है। तारिक कहते है कि “इन तारीफों से जन्नत को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।” वह चाहते है कि उनकी बेटी भविष्य में पर्यावरणविद् बने और झील को बड़े पैमाने में साफ करने की कोशिश करें।

आगे वह कहते है कि “जन्नत बचपन से ही इस झील से जुड़ी हुई है। तीन साल की उम्र में वह किसी को भी झील में कचरा ना फेंकने के लिए मना लेती थी। एक बार, उसने एक पर्यटक को सड़क से वापस आने और झील से प्लास्टिक की बोतल निकालने के लिए मजबूर कर दिया था।”

जन्नत के पिता को अभी भी वह घटना याद है जिसने उन्हें झील में बढ़ते प्रदूषण स्तर के बारे में चिंतित महसूस करवाया था। उन्होंने कहा कि“ एक दिन वह झील में एक विदेशी पर्यटक को नाव की सवारी करवा रहे थे। उस पर्यटक ने अपनी बची हुई सिगरेट को झील में फेंकने से इन्कार कर दिया और उसे एक कागज के टुकड़े में लपेट कर अपनी जेब में रख लिया। उस घटना ने तारिक अहमद को बदल दिया। तब तारिक ने महसूस किया कि सभी को झील की सफाई में योगदान देना चाहिए। जन्नत को तब गुस्सा आता है जब वह झील के आसपास किसी को धूम्रपान या कचरा फेंकते हुए देखती है।

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तारिक अहमद कहते है कि “मैं चाहता हूं कि अन्य लोग भी आगे आएं और झील की सफाई में मदद करें, ताकि इसका स्वच्छ पानी अधिक से अधिक लोगों को कश्मीर की ओर आकर्षित करें। हमने झील से कई शराब की बोतलें बरामद की हैं। झील को साफ रखने के लिए सरकार को डल झील क्षेत्र में शराब की दुकानों को बंद कर देना चाहिए और शराब पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।”

2018 में झील की सफाई करते हुए जन्नत का एक वीडियो वायरल हुआ था। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विटर पर उसके प्रयासों की सराहना की थी और अपने रेडियो टॉक शो मन की बात में भी इसके बारे में बात की थी।”

दो साल पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पुराने वीडियो में, जन्नत को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “आज, मेरे पिता और मैंने झील को थोड़ा साफ किया है। हमें बहुत सारा कचरा मिला है, लेकिन केवल मैं डल झील की सफाई कर रही हूँ। हमारे पास सबसे अच्छी चीजों में से एक डल झील हैं, हम सभी को आगे आना चाहिए और अपनी सुंदरता को बनाए रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए।

जन्नत और उसके पिता ने मिशन डल झील नाम से एक फेसबुक पेज भी शुरू किया है। इसमें वे विभिन्न पहलों के बारे में बात करते हैं और ऐसी चीजों पर चर्चा करते हैं जिनमें सरकार झील को साफ करने के लिए कदम उठा सकती है।

Reported by Wahid Bhat, Edited by Kirti Rawat