दिल्ली में सीवर सफाई के दौरान 64 सफाई कर्मियों ने गंवाई जान:आयोग

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देश में ग़रीबों की जान कितनी सस्ती है इसका अंदाज़ा सीवर साफ़ करने वाले सफाई कर्मियों की मौतों से लगाया जा सकता है. जान गंवाने के बाद उनके परिवार वालों को सालों तक मुआवज़े के नाम पर सिर्फ़ बाते ही मिलती रहीं.

बीते मंगलवार को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने बताया कि 1993 से अब तक राजधानी दिल्ली में 64 लोग सीवर की सफ़ाई करते हुए अपनी जान गंवा चुके हैं. सीवर की सफ़ाई करते हुए अपनी जान गंवाने वाले 64 लोगों के परिवार वालों को राज्य सरकार ने 10-10 लाख रुपय का मुआवज़ा दिया गया है.

फ़ोटो-सोशल मीडिया

दिल्ली के सामाजिक कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि इमारतों के सेप्टीक टैंक में ये मौतें हुई हैं, जहां दिल्ली जल बोर्ड की सीवर सफाई मशीनें नहीं पहुंच पाती. दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद, जाला ने कहा कि पिछले दो साल में अकेले दिल्ली में ही सीवर में 38 लोगों की मौत हुईं और 1993 के बाद से शहर में 64 मौतें हो चुकी हैं.

फ़ोटो-सोशल मीडिया

सीवर सफाई के कारण हुई मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, ‘दुनिया के किसी देश में लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर्स में नहीं भेजा जाता है. हर महीने मैला ढोने के काम में लगे चार से पांच लोग की मौत हो रही है.’