बाढ़ से अब तक 1000 लोगों की मौत, 54 लाख बेघर, 70 लाख प्रभावित, 17 लाख शरणार्थी कैंप में

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लगता है इस साल मानसून रौद्र रूप धारण कर भारत में आया है, शायद यही कारण है कि देश के कई हिस्से जलमग्न है। केरल सहित पांच राज्यों में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकी 17 लाख से ज्यादा बेघर लोग शरणार्थी कैंप में रहने को मजबूर हैं। हांलाकि गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बारिश और बाढ़ के कारण 22 अगस्त 2018 तक कुल 993 लोगों की मौत हुई। मारे गए इन लोगों में 400 केरल से हैं।

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गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में बाढ़ के कारण करीब 70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें करीब 17 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रह रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक केरल सहित उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ के चलते सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इससे पहले 22 अगस्त 2018 तक केरल में कुल 387 लोगों की मौत की रिपोर्ट्स सामने आई थी और अब मौत का आंकड़ा 400 पर पहुंच गया है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केरल के अलावा उत्तर प्रदेश में 204, पश्चिम बंगाल में 195, कर्नाटक में 161 और असम में 46 लोगों की मौत हुई है। केरल में बाढ़ से बिगड़े हालातों के चलते 54 लाख से ज्यादा लोग लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें 14.52 लाख लोगों को राहत कैंपों में शरण लेनी पड़ी है। इसके अलावा असम में 11.46 लाख लोग बाढ़ के चलते प्रभावित हुए हैं। इनमें से 2.45 लाख लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है।

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केन्द्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले साल 2017 में आई बाढ़ और भारी बारिश से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए इन लोगों में अकेले बिहार में में ही 514 लोगों की मौत हुई थी। बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल में 261, असम में 160, महाराष्ट्र में 124 और उत्तर प्रदेश में 121 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, साल 2016 के दौरान बाढ़ के चलते बिहार में 254 और मध्य प्रदेश में 184 लोगों को अपनी जिन्दगी से हाथ धोना पड़ा था।

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खास बात यह है कि बीते कई सालों से बाढ़ की ऐसी गंभीर स्थितियों को सरकार अच्छी तरह से जानती है जबकी आम लोगों की मौत के आंकड़े के बावजूद केंद्र सरकार राज्यों में आने वाली बाढ़ और बाढ़ राहत के लिए विशेष फंड बनाने की दिशा में अब तक कोई खास काम नहीं कर सकी है।

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हाल ही में गृह मंत्रालय ने देश के अलग-अलग जिलों में बाढ़ के पूर्वानुमान और राहत इंतजामों को लेकर कराए गए एक सर्वे में यह बात कही थी कि करीब-करीब हर राज्य में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। बावजूद इसके हर साल होने वाली ऐसी स्थितियों के लिए अब तक कोई ठोस इंतजाम न हो पाना केन्द्र और राज्य सरकार की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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