भारत में है ये चार रोड नेटवर्क, दो की हालत बेहद खराब, कैसे होगा विकास?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

रिपोर्ट- पिन्की कड़वे

किसी भी देश में उसके आर्थिक विकास की पहली मूलभूत जरुरत एक बेहतर और सुचारू परिवहन प्रणाली होती है। जिसे हम कनेक्टिविटी या सड़कों, ट्रेनों के नेटवर्क के रूप में जानते हैं। भारत जैसे विशाल देश में सड़क मार्ग दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क हैं। देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों को जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए बंदरगाह सम्पर्क परियोजना भी चलाई गई है।

449 किलोमीटर का सम्पर्क कार्यक्रम साल 2000 में शुरू किया गया था जो अब लगभग पूरा हो चुका है। इस वक्त देश में सड़कों के लिए देश में एक नई किस्म की प्रणाली काम कर रही है, जिसे हम ई-टोल सिस्टम के रूप मे जानते हैं, लेकिन आए दिन टोल टेक्स के चक्कर हमें काफी देर तक ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है।

READ:  रावण की जगह मोदी-अडानी-अंबानी का पुतला दहन, किसान कर रहे कृषि कानून का विरोध

ई-टोल सिस्टम
इस समय टोल प्‍लाजा सिस्टम ट्रैफिक जाम कि बड़ी समस्या है जिससे देरी भी होती है, लेकिन अब देश भर में नेशनल हाईवे पर इलेक्‍ट्रॉनिक टोल-कलेक्‍शन (ईटीसी) प्रणाली लगाई जा रही है। इसके जरिए टॉल-प्‍लाजा पर चलते वाहनों से इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से टॉल लिया जाएगा। यह फ़ास्ट टैग प्रणाली की कोशिश का हिस्सा है। इसमें चिप लगे रेपिड फ़ास्ट टैग से गाड़िया तेज रफ्तार से बिना रुके निकल सकेंगी।

भारत में सड़को के प्रकार
नागपुर योजना (1944-54) के अंतर्गत सड़कों को चार भागों में विभाजित किया गया है। इसमें सबसे पहले नेशनल हाइवे यानी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। वहीं दूसरे नंबर पर प्रांतीय राजमार्ग जबकि तीसरे नंबर पर जिला और चौथे नंबर पर ग्रामिण सड़के रेखांकित की गई है।

सड़क दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में कमी
2016 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 4.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सितंबर 2017 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 5.2 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 4.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। असम, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य सभी राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में 2 से 10 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला है।

READ:  Shun violence, ready to help you with jobs opportunities: LG Sinha asks Militants

दुर्घटना रिपोर्ट का नया प्रारूप
नया प्रारूप आने वाले वर्षों में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण जोखिम वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।

ब्लैक स्पोटों का सुधार
मंत्रालय ने करीब 789 दुर्घटना वाले ब्‍लैक स्‍पॉटों की पहचान की है। इनमें से 189 ब्‍लैक स्‍पॉट पर रिसर्च कर उनमें सुधार किया गया है। वहीं 256 ब्लैक स्पॉट पर अब भी काम किया जाना बाकी है।

सड़कों की आम समस्या
भारत जैसे भौगोलिक देश में सड़कों की कई समस्याएं हैं। शहरों में सड़कों के रास्ते काफी सकरे होते हैं। बारिश के मौसम में पानी निकालने के लिए बेहतर ट्रैक और व्यवस्था नहीं है, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो जाता है। सड़कों की स्थिति परिवहन के लिए सही नहीं हैं।

READ:  मध्य प्रदेश में 'हमारा घर हमारा विद्यालय योजना' हो रही फ्लाप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सड़कों के निर्माण में जितनी लगात लगती हैं उतना पैसा निर्माण में लगाया नहीं जाता बल्कि कम पैसा खर्च करके, सस्ता सामान लगाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा और दुर्घटनाओं को निमंत्रण दिया जाता है। ट्रैफिक की समस्या होती हैं जिससे दुर्घटना होने के आसार बढ़ जाते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांवों में सड़कों की हालत काफी खस्ता हैं इसका कारण सस्ता सामान लगाकर सड़क निर्माण करना है। जिसके चलते एक साल में ही सड़कों में गढ्ढें होने लगते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार को चाहिए कि विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए सड़कों के नेटवर्क पर विशेष तौर पर ध्यान दें।