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NCRB : देश में हर दिन 31 किसानों ने की आत्महत्या

Over 44% of rural households are OBC; NSO survey
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Ground Report । Nehal Rizvi

  • साल 2016 में कुल 11,379 किसानों ने आत्महत्या की
  • हर महीने 948 या हर दिन 31 किसानों ने आत्महत्या की
  • भारत में आत्महत्या करने वाले किसानों में से अधिकांश पुरुष
  • किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र लगातार पहले स्थान पर
  • सरकार छिपा रही किसानों की आत्महत्या के सही आंकड़े?

केंद्र सरकार ने करीब तीन साल की देरी के बाद किसान आत्महत्या के आंकड़े जारी कर दिए हैं। तीन साल के लंबे अंतराल के बाद आखिकरकार किसान आत्महत्या के ताज़ा आकंड़ें भी जारी कर दिए गए हैं। बीते शुक्रवार को केंद्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने रिपोर्ट जारी कर इस बात की पुष्टि की कि साल 2016 में कुल 11,379 किसानों ने आत्महत्या की थी।

इसका मतलब ये हुआ कि हर महीने 948 या हर दिन 31 किसानों ने आत्महत्या की। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में 11 हज़ार 379 किसानों ने आत्महत्या की थी। आत्महत्या करने वालों में 6 हज़ार 270 किसान और 5 हज़ार 109 खेतीहर मज़ूदर शामिल है।

पिछले साल जुलाई 2018 में केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया था कि 2016 में भारत में 11,370 किसानों ने आत्महत्या की थी। लेकिन सरकार ने कहा था कि ये प्रोविजिनल यानी की अनंतिम आंकड़ा है और एनसीआरबी को अंतिम रिपोर्ट जारी करना बाकी था।

एनसीआरबी ने भारत में आकस्मिक मौतों और आत्महत्याओं की अंतिम रिपोर्ट अब जारी कर दी है। इससे पहले 2015 में ये रिपोर्ट जारी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 और 2015 के मुकाबले 2016 में किसान आत्महत्या के मामलों में गिरावट दर्ज हुई। 2014 में 12 हज़ार 360 किसानों ने आत्महत्या की थी। जबकि 2015 में 12 हज़ार 602 किसानों ने अपनी जान दी।

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रिपोर्ट में 2015 के मुकाबले 2016 में किसानों की आत्महत्या में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई तो वहीं खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के मामलों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई है।हालांकि पहली बार है जब NCRB ने अपनी रिपोर्ट में किसान आत्महत्या के कारण नहीं बताएं है। ना ही रिपोर्ट में राज्यवार आंकड़े दिए गए हैं। सिर्फ 5 राज्यों में प्रतिशत में आकंड़े बताए गए हैं।

अगर राज्यों की बात करे तो महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या का प्रतिशत बताया गया है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। पहले की रिपोर्टों में आत्महत्या के कारणों की जानकारी और किस वजह से कितने किसानों ने आत्महत्या की, ये सारी जानकारी दी जाती थी।

महाराष्ट्र –  32.2 फीसदी किसान आत्महत्या के मामले

कर्नाटक – 18.3 फीसदी

मध्यप्रदेश – 11.6 फीसदी

आंध्रप्रदेश –  7.1 फीसदी

छत्तीसगढ़ – 6 फीसदी

भारत में आत्महत्या करने वाले किसानों में से अधिकांश पुरुष हैं, जबकि इसमें महिला किसानों की संख्या सिर्फ 8.6 फीसदी ही दिखाई गई है। इसकी एक प्रमुख वजह ये हो सकती है कि खेत पर काम करने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं को किसान का दर्जा नहीं दिया जाता है।

किसान आत्महत्या- 6, 270

पुरुष – 275

महिलाएं –  5,995

खेतीहर मज़दूर – 5,109

पुरुष – 4476

महिलाएं –  633

किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है। साल 2016 में इस राज्य में सर्वाधिक 3,661 किसानों ने आत्महत्या की। इससे पहले 2014 में यहां 4,004 और 2015 में 4,291 किसानों ने आत्महत्या की थी।

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सरकार क्यों छिपा रही है सही आंकड़ा ?

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक NCRB ने 18 महीने पहले ही गृह मंत्रालय को ये रिपोर्ट सौंप दी थी। अंग्रेजी अख़बार को दिए गए बयान में एक पूर्व अधिकारी ने ये जानकारी दी। पूर्व अधिकारी ने ये भी बताया कि साल 2016 के लिए किसान आत्महत्या के कारणों पर विस्तार से आंकड़े जुटाए गए थे। लेकिन हैरानी की बात है कि शुक्रवार को जारी हुई इस रिपोर्ट में कारणों को प्रकाशित नहीं किया गया।

21 अक्टूबर को ही NCRB ने अपराध की घटनाओं पर ताज़ा रिपोर्ट जारी की थी। उसमें साल 2016 के आंकड़ो को शामिल किया गया था। उस रिपोर्ट में भीड़ हत्या, खाप पंचायत के निर्देशों पर हत्या और सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए लोगों की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।