दुनिया 5G इंटरनेट की ओर कश्मीर 2G पर निर्भर, यह कैसा विकास?

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विश्व के साथ- साथ भारत भी 5 जी की दुनिया में कदम रखने वाला हैं, तो वहीं भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहाँ इंटरनेट की 2 जी सुविधाएं उपलब्ध है। 5 अगस्त को कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35 ए को हटे हुए एक साल होने वाला है, और वहाँ अभी तक पूरे तरीके से इंटरनेट बहाल नहीं हुआ हैं। जम्मू – कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर में 4 जी इंटरनेट पर लगे प्रतिबंध को 29 जुलाई से बढ़ाकर 19 अगस्त कर दिया है। 2 जी इंटरनेट की स्पीड 14-16 केबी प्रति सेकेंड होती है जबकि 4 जी इंटरनेट कनेक्शन में 100 एमबी प्रति सेकेंड की स्पीड आती है दोनों ही इंटरनेट सुविधा में जमीन- आसमान का अंतर हैं।

5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में आर्टिकल 370 और 35 ए को हटाने के बाद से ही पूरे जम्मू – कश्मीर में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया था।

डिजिटल राइट्स गुप्र एक्सेस नाउ के मुताबिक कश्मीर में 150 दिन से अधिक दिन तक इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा था जो कि किसी लोकतंत्र में इंटरनेट पर लगा सबसे लंबा प्रतिबंध है। जनवरी माह में सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर में इंटरनेट बैन के खिलाफ दाखिल याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था, कि “संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत इंटरनेट का अधिकार भी शामिल है।” 

दिल्ली में स्थित सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर के अनुसार, विश्न में इंटरनेट पर सबसे अधिक प्रतिबंध लगाने वाला देश भारत है। 2019 में देश में 106 बार इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा था, जिसमें से 55 बार सिर्फ जम्मू – कश्मीर में ही लगा था।

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4 जी इंटरनेट ना होने का नुकसान

कोरोना के बाद लगे लॉकडाउन के बाद से पूरे देश में वर्क फ्रॉम होम का कल्चर चल पड़ा है। ऐसे में कश्मीर में इंटरनेट पर लगी पाबंदियों के कारण लोगों को अपने ऑफिस का काम करने में तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

वाहिद बताते है, जो कि एक पत्रकार हैं “मुझे अपना काम करने के लिए रिसर्च करनी पड़ती है, 4 जी इंटरनेट ना होने की वजह से मुझे काम करने में देर लग जाती है। जो स्टोरी दो दिन में पूरी होनी होती हैं, उसमें चार दिन लग जाते हैं।”

स्लो इंटरनेट की वजह से कई छात्रों को ऑनलाइन क्लास लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। श्रीनगर के इस्लामिया कॉलेज में पढ़ने वाले दानिश नजीर बताते है कि “इंटरनेट की स्लो स्पीड की वजह से मैं और मेरे दोस्त ऑनलाइन क्लास नहीं ले पाए।” 

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उन्होंने बताया कि “मेरे विभाग से मुझे वीडियो का नोटिफिकेशन भी आया था जिसे मैं इंटरनेट की स्लो स्पीड की वजह से स्वीकार नहीं कर पाया। अगर मैं वह नोटिफिकेशन स्वीकार भी कर लेता तो हाई स्पीड इंटरनेट के अभाव के कारण कुछ समय तक ही ले पाता। कॉलेज छोड़ने के बाद मैं अपने करियर को लेकर चिंतित हूँ क्योंकि हमें व्हाट्सएप, यूट्यूब में रहने के लिए बोला गया है और परीक्षाओं का नोटिस भी आ गया हैं।”

इंटरनेट पर 150 दिन से अधिक दिन तक लगे प्रतिबंध की वजह से जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था और व्यापार को £767 मिलियन का नुकसान हुआ है। श्रीनगर की इकरा अहमद, तुलपल्व ऑनलाइन क्लोथिंग स्टोर की संस्थापक बताती है कि “ मैनें उम्मीद नहीं छोड़ी और इंटरनेट के दोबारा बहाल होने के बाद से मैं अपने व्यवसाय के पुनर्निर्माण के लिए उत्साहित थी। 2 जी इंटरनेट के साथ इंस्टाग्राम और अन्य साइट्स अभी अच्छे से नहीं चल रहे हैं, और मुझे लगता है कि मेरे व्यवसाय के बढ़ने की संभावना दिन प्रति दिन बढ़ रही है।”

“मैं यह समझा भी नहीं सकती कि वो समय कितना कठिन था; मोदी सरकार हमारी भावनाओं और हमारे करियर के साथ खेल रही है।” 

-इकरा अहमद, तुलपल्व ऑनलाइन क्लोथिंग स्टोर की संस्थापक  

2 जी सुविधा के लिए 4 जी का भुगतान

कश्मीर में लोगों को इंटरनेट की सुविधा 2 जी में मिल रही है, लेकिन वह भुगतान 4 जी इंटरनेट का कर रहे है। कश्मीर में रहने वाले बुरहान नाजी भट बताते है कि “ कोरोना से बचाव के लिए अगर हम कोई वीडियो भी देखना चाहे तो पूरा वीडियो शाम तक ही खुलता है, क्योंकि 4 जी इंटरनेट की सुविधा अभी भी उपलब्ध नहीं है। लेकिन 2 जी इंटरनेट का भुगतान भी हम 4 जी इंटरनेट के बराबर ही कर रहे है।”

Written By Kirti Rawat, She is Journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication New Delhi.

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