बटाला: अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका 23 की मौत और एक बार फिर सोता रह गया प्रशासन

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्राउंड रिपोर्ट | चंडीगड़

पंजाब के गुरदासपुर जिले में आने वाला बटाला बुधवार को अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके से दहल गया। घनी आबादी के बीच चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ जिससे दो मंजिला फैक्ट्री के परखच्चे उड़ गए, इसमें 23 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज़्यादा घायल हो गए। घायलों में 7 की हालत नाज़ुक बनी हुई है।
सभी घायलों को इलाज के लिए अमृतसर भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 2-2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है और बाटला ADC को जांच के आदेश दे दिए हैं।

CM Amrinder Singh’s tweet on blast

रिहाइशी इलाके में प्रशासन की नाक के नीचे चलती रही मौत की फैक्ट्री

यह अवैध फैक्ट्री एक घनी आबादी वाले इलाके में चल रही थी। धमाके में मरने वाले अधिकतर फैक्ट्री के मज़दूर हैं, इसमें फैक्ट्री का मालिक भी शामिल है। घटना के दौरान सड़क से गुज़र रहे कुछ लोगों की भी इस धमाके में मौत हुई है। फैक्ट्री में लगी आग को बुझाने के लिए मौके पर फायर ब्रिगेड और राहत बचाव के लिए NDRF की टीमें तैनात की गई थी। धमाके की वजह का अभी पता नहीं चला है। जांच टीम यह पता लगाने में लगी है कि उस दौरान फैक्ट्री में कितने कर्मचारी मौजूद थे। फैक्ट्री में हुए धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की बिल्डिंग के शीशे टूट गए। धमाके की आवाज़ के किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।

स्थानीय लोगों ने की थी कई बार शिकायत लेकिन नहीं जागा कुम्भकरण प्रशासन

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हीने कई बार रिहाइशी इलाके में चल रही इस फैक्ट्री की शिकायत प्रशासन को की थी लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

अगर छुट्टी नहीं होती तो खतरे में पड़ जाती कई मासूम बच्चों की जान

इस हादसे में कई मासूम बच्चों की जान जा सकती थी।फैक्ट्री के करीब मौजूद स्कूल की छुट्टी धमाके से महज़ आधे घंटे पहले हुई अगर धमाके के समय स्कूल खुला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। फैक्ट्री के पास IELTS कोचिंग इंस्टिट्यूट भी है जो बुधवार को छुट्टी होने की वजह से बंद था।

प्रशासन की लापरवाही

इस हादसे में एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। रिहाइशी इलाके में कैसे पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। बिना इजाज़त कैसे फैक्ट्री चलती रही और प्रशासन ने कार्यवाही क्यों नही की। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद भी प्रशासन हरकत में क्यों नहीं आया। क्या बटाला प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतज़ार में था।

लोगों के मरने के बाद कुछ समय के लिए जागता है प्रशासन फिर करता है अगले हादसे का इंतज़ार

अभी भी देश के कई इलाकों में अवैध रूप से इस तरह के कारखाने प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे हैं। कहीं पटाखा फैक्ट्री, तो कहीं एलपीजी भरने वाली अवैध दुकानें। हाल ही में सूरत हादसे में कई बच्चों की जलकर मौत हो चुकी है। उसके बाद भी हम सबक लेने को तैयार नहीं है। हादसे होते है, लोग मरते हैं, अखबारों में सुर्खियां बनती हैं, मुआवज़े का ऐलान कर सरकार पीछा छुड़ा लेती है। सालों जांच चलती रहती है कोई गुनहगार नहीं पकड़ा जाता। पकड़ा गया भी तो उसे सालों तक सज़ा नहीं होती। दिल्ली का उपहार सिनेमा अग्नि कांड तो आपको याद ही होगा…शायद न हो? क्योंकि..जनता भी सबकुछ भूल ही जाती है।