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2019 चुनावों से दूरी बनाता दिख रहा है भाजपा का आडवाणी खेमा?

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न्यूज़ डेस्क।। 2019 चुनावों की सरगर्मी शुरु हो चुकी है। तीन राज्यों में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का उत्साह लौटा है। इन चुनावों को सेमीफाईनल की तरह देखा गया। भाजपा सेमीफाईनल हार चुकी है। इन चुनावों से पहले भाजपा को मिल रही लगातार जीत से ऐसा माहौल बन गया था कि 2019 की जंग एकतरफा होने वाली है, लेकिन अब तस्वीर उलट चुकी है। भाजपा के सामने संयुक्त विपक्ष की चुनौती आ खड़ी हुई है। कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन से विपक्षी दलों में भी उत्साह है। आने वाले समय में कांग्रेस नीत यूपीए का कुन्बा और बड़ा हो सकता है। वहीं भाजपा नीत एनडीए लगातार टूटता दिखाई दे रहा है। पॉलिटकल पंडितों की माने तो 2019 में बिना गठबंधन सरकार बनाना मुश्किल होगा, ऐसे में भाजपा के सामने नए सहयोगियों की तलाश ज़रुरी है।

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लेकिन मौजूदा हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि भाजपा नए सहयोगी तो दूर अपनी पार्टी में ही सहयोग खोती जा रही है। भाजपा के कई कद्दावर नेताओं ने 2019 चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है, ऐसे में भाजपा के सामने अपने किले बचाने के लिए मज़बूत उम्मीदवारों की कमी खड़ी हो सकती है। सुषमा स्वराज जो पिछली बार मध्यप्रदेश की विदिशा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ी थी, इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी। उमा भारती ने भी अगला चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। आडवानी और मुरली मनोहर जोशी चुनाव लड़ेंगे या नहीं इस बात पर अभी संशय है। अरुण जेटली तो पिछली बार मोदी लहर में भी चुनाव नहीं जीत पाए थे।

मध्यप्रदेश में चुनाव हारने के बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में बुला लिया जाएगा, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने यह स्पष्ट कर दिया की वो मध्यप्रदेश छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाले । यह सभी नेता भाजपा के आडवाणी खेमें के माने जाते हैं। इतना तय है 2019 की राह भाजपा के लिए आसान नहीं होने वाली।