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मोदी सरकार की 10 गलतियां जिनसे भारत में प्रलय बन गया कोरोना

मोदी सरकार की 10 गलतियां जिनसे कोरोना बन गया प्रलय
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मोदी सरकार की 10 गलतियां: देश में कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second wave) प्रलय बन कर आई है। सरकार (Modi Sarkar) ने इसे पहचानने में देर कर दी या कह सकते हैं कि लापरवाही बरती। आईये नज़र डालते हैं सरकार की उन 10 गलतियों पर जिनकी वजह से कोरोना देश में प्रलय बन गया। (10 Mistakes of Modi Govt. on corona)

1. दूसरे देशों से नहीं लिया सबक

जब भारत में कोरोना (covid-19) के मामले कम हो रहे थे। तब दूसरे देशों में दूसरी लहर का प्रकोप जारी था। इसके चलते अमेरिका और यूरोपीय देशों में लॉकडाउन (Lockdown) था। कोरोना के यूके, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन ने तबाही मचाई हुई थी। ये स्ट्रेन पहले से ज़्यादा खतरनाक थे। लेकिन भारत ने इसको लेकर सचेत नहीं था। दूसरे देशों से आने वाले नागरिकों की जांच करने में भारत ढील बरतता रहा। कोरोना को न सरकार पहली वेव में देश के अंदर आने से रोक पाई न ही दूसरी लहर में इसे कुछ सबक लिया। मोदी सरकार की गलतियां यहीं खत्म नहीं होती।

2. नहीं की वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग

मोदी सरकार की गलतियां, नहीं करवाई कोरोना वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को पहचानने की भारत ने कोशिश तक नहीं की। जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) के ज़रिए वायरस के प्रकार को समझा जाता है। मोदी सरकार ने यहां भी गलतियां की और इस रिसर्च पर ध्यान ही नहीं दिया। उल्टा भारत के जो संस्थान यह काम कर रहे थे, उनका फंड ही सरकार ने रोक दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को अक्टूबर में ही स्ट्रेन के डबल म्यूटेशन का पता चल गया था लेकिन इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

3. पूरा एक साल बर्बाद कर दिया

शमशान घाट में फुंक चुकी लाशों की कतार। ये तस्वीर कानपुर की है।

भारत में जब मामले कम होना शुरु हुए थे, तब दुनिया दूसरी लहर (Second Wave) से लड़ रही थी। उन देशों से सबक लेकर भारत अपनी तैयारियां पुख्ता कर सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस दौरान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को दूसरी लहर के लिए तैयार किया जा सकता था। प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार समूह ने देश में ऑक्सीज़न और वेंटीलेटर की कमी को लेकर एक मीटिंग में पहले ही चेताया था लेकिन इस पर भी ध्यान नहीं दिया गया।

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4.अनलॉक के बाद नहीं रखा गया सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान

मोदी सरकार की गलतियां, क्यों करवाया कुंभ
Kumbh Mela 2021

भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था को तो खोल दिया लेकिन इसके साथ कोविड अप्रोप्रिएट बिहेवियर (Covid Appropriate Behavior) जैसे मास्क की अनिवार्यता और सोशल डिस्टेंसिंग पर सख्ती रखी होती तो शायद मामले इतने नहीं बढ़ते।

सुपर स्प्रेडर इवेंट का आयोजन खुद सरकार ने करवाया

भारत में कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, वायरस भीड़ का इंतेज़ार कर रहा था। सरकार ने इस दौरान चुनाव और कुंभ मेले (Kumbh 2021) का आयोजन कर वायरस को ही चुनौती दे डाली। रैलियों और कुंभ स्नान में हज़ारों की भीड़ इकट्ठा की गई। जबकि कोरोना देश में मौजूद था। इस तरह के जमावड़े पर प्रतिबंध किया जाना चाहिए था।

चुनावों में व्यस्त रही पूरी सरकार

मोदी सरकार की गलतियां, चुनावी रैलियों में जुटाई हज़ारों की भीड़
Amit shah rally in west bengal

सरकार के सभी मंत्री और नेता बंगाल चुनावों में व्यस्त दिखाई दिए। हज़ारों मौतें हो जाने के बाद प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियां (Election Rallies) रद्द करने का फैसला लिया। बंगाल के चुनावों (Bengal Elections) को जान बूझकर 8 चरणों में कराया गया। जबकि कोरोना को देखते हुए इसे 2 या 3 चरण में कराया जा सकता था। कुंभ मेले में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ने दी गई। जबकी सांकेतिक कुंभ से काम चलाया जा सकता था। जो बाद में आखिर किया ही गया।

5. तूफान के पहले की शांति को नहीं समझ पाए

भारत में दूसरी लहर के संकेत मिलने लगे थे। लेकिन मामले पहले से कम थे। तो सरकार को लगा कि वो जंग जीत गए हैं। जबकि यह केवल तूफान के पहले की शांति थी।

6. वैक्सीन के घमंड में चूर रहे

मोदी सरकार की गलतियां, वैक्सीन के घमंड में रहे चूर

भारत में बनी वैक्सीन (Covid-19 Vaccination) से सरकार इतनी उत्साहित हो गई मानो कोई ब्रह्मास्त्र मिल गया हो। जबकि वायरस वैक्सीन से एक कदम आगे निकल गया। सरकार जानती थी की पूरे देश का टीकाकरण में साल भर का समय लगेगा। जबकि वायरस का प्रसार एक महीने के अंदर ही प्रलय ले आया।

वैक्सीन और ऑक्सीज़न विदेशों को करते रहे एक्सपोर्ट

विश्व गुरु बनने के चक्कर में मोदी सरकार ने देश को ही बर्बाद कर दिया। वैक्सीन दूसरे देशों को एक्सपोर्ट होती रही जबकि देश में ही वैक्सीन की किल्लत थी। ऑक्सीज़न और ज़रुरी दवाएं भी भारत ऐसे संकट के समय दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर रहा था।

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7.जब हज़ारों लोग मर रहे थे तब भी प्रधानमंत्री सोते रहे

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों में तेज़ी से मामले बढ़ रहे थे। इस दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी सोते रहे और बंगाल में हज़ारों की लोगों की भीड़ जुटा कर कोरोना फैलाते रहे।

8.नहीं लिया ऑक्सीज़न की कमी पर तुरंत फैसला

लगातार राज्यों की तरफ से केंद्र को ऑक्सीज़न की कमी (Oxygen Crisis in India) के बारे में कहा गया। उल्टा केंद्र सरकार ने राज्यों को यह कह दिया कि वो ऑक्सीज़न की डिमांड को कंट्रोल करें। बाद में जब देश की राजधानी में ऑक्सज़न का संकट आया तब जाकर राज्यों का ऑक्सीज़न कोटा बढ़ाया गया।

9.लॉकडाउन लगाने में की देरी

सरकार ने लॉकडाउन को आखिरी विकल्प की तरह देखा । जबकि राज्यों को मामले बढ़ने के बाद आखिरकार यही फैसला लेना पड़ा।

10.मोदी सरकार हर मोर्चे पर हो गई फेल

जब मामले बढ़ने लगे तब आनन फानन में सरकार ने दूसरे देशों में सफल रही वैक्सीन को मंज़ूरी दी। कोरोना की दूसरी लहर ने जब युवाओं को चपेट में लिया तब जाकर 18 साल से उपर की उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन खोला गया। वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए फंड की मांग कर रहे थे। उनका फंड बढ़ाने का फैसला दूसरी लहर के प्रलयकारी हो जाने के बाद लिया गया।

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