कृषि कानूनों पर रोक

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने जो 10 बड़ी बातें कहीं हैं उन्हें ज़रूर पढ़ा जाना चाहिए..

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सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद किसानों को बड़ी राहत मिली है। वहीं मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। हांलाकि सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक के लिए तीनों कृषि कानून पर रोक लगा दी है। इस रोक के बाद ये कानून अगले आदेश तक लागू नहीं सकेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति गठन किया है। इस समिति में हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम कमिटी के सदस्य के तौर पर सुझाए गए हैं।

आइए जानते हैं आज की किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई की 10 बड़ी बातें:-

  • सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि जो वकील हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि जब आदेश सही न लगे तो अस्वीकार करने लगें। हम इसे जीवन-मौत के मामले की तरह नहीं देख रहे। हमारे सामने कानून की वैधता का सवाल है। क़ानूनों के अमल को स्थगित रखना हमारे हाथ में है।लोग बाकी मसले कमेटी के सामने उठा सकते हैं।
  • CJI ने कहा कि अगर बिना किसी हल के आपको सिर्फ प्रदर्शन करना है, तो आप अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन करते रहिए। लेकिन क्या उससे कुछ मिलेगा? उससे हल नहीं निकलेगा। हम हल निकालने के लिए ही कमेटी बनाना चाहते हैं।
  • कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया, ‘यह कमेटी हमारे लिए होगी। इस मुद्दे से जुड़े लोग कमेटी के सामने पेश होंगे। कमेटी कोई आदेश नहीं देगी, न ही किसी को सजा देगी। यह सिर्फ हमें रिपोर्ट सौंपेगी। हमें कृषि कानूनों की वैधता की चिंता है। साथ ही किसान आंदोलन से प्रभावित लोगों की जिंदगी और संपत्ति की भी फिक्र करते हैं।’
  • कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम अपनी सीमाओं में रहकर मुद्दा सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। यह राजनीति नहीं है। राजनीति और ज्यूडिशियरी में फर्क है। आपको को-ऑपरेट करना होगा।’
  • सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने फिर कहा, ‘हम कृषि कानून का अमल स्थगित करेंगे, लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं। हमारा मकसद सिर्फ सकारात्मक माहौल बनाना है। उस तरह की नकारात्मक बात नहीं होनी चाहिए जैसी एम एल शर्मा ने आज सुनवाई के शुरू में की। किसानों के वकील शर्मा ने कहा था कि किसान कमेटी के पास नहीं जाएंगे कानून रद्द हो।
  • कोर्ट ने कहा कि ‘अगर किसान सरकार के समक्ष जा सकते हैं तो कमेटी के समक्ष क्यों नहीं? अगर वो समस्या का समाधान चाहते है तो हम ये नहीं सुनना चाहते कि किसान कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे।’
  • कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा, ‘कोई भी ताकत, हमें कृषि कानूनों के गुण और दोष के मूल्यांकन के लिए एक समिति गठित करने से नहीं रोक सकती है। यह समिति न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होगी। समिति यह बताएगी कि किन प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए।’
  • पीएस नरसिम्हा ने कोर्ट को बताया कि प्रतिबंधित संगठन भी आंदोलन को शह दे रहे हैं। इसके बाद सीजेआई ने एटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या आप इसकी पुष्टि करते हैं? एटॉर्नी ने कहा कि मैं पता करके बताऊंगा। इसके बाद सीजेआई ने कहा कि आप कल तक इस पर हलफनामा दीजिए।आप इस पहलू पर कल तक जवाब दें।
  • सीजेआई ने कहा कि हम अपने आदेश में कहेंगे कि किसान दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से रामलीला मैदान या किसी और जगह पर प्रदर्शन के लिए इजाजत मांगें। रैली के लिए प्रशासन को आवेदन दिया जाता है। पुलिस शर्तें रखती है। पालन न करने पर अनुमति रद्द करती है।
  • सीजेआई ने कहा कि हम अपने आदेश में कहेंगे कि किसान दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से रामलीला मैदान या किसी और जगह पर प्रदर्शन के लिए इजाजत मांगें। रैली के लिए प्रशासन को आवेदन दिया जाता है। पुलिस शर्तें रखती है। पालन न करने पर अनुमति रद्द करती है।
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