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दिल्ली में लगेंगी मुर्दे जलाने की विशेष भट्ठियाँ

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नई दिल्ली। दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गयी हैं। जहां एक औऱ अस्पतालों और आईसीयू का विस्तार किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर शमशानों में भी अंतिम संस्कार के लिए ईंटों से बनी भट्ठियों को बनाया जा रहा है। दिल्ली नगर निगम का कहना है कि इन भठ्ठियों में मुर्दे को कम समय और केवल एक चौथाई लकड़ियों के साथ जलाया जा सकेगा।

हालांकि दिल्ली में कोरोना के मामले अब घटने लगे हैं पर महामारी की दूसरी लहर में दिल्ली का ऐसा बुरा हाल हुआ की शहर के पार्कों, पार्किंग स्थलों और कुत्तों के शमशान में भी मानव अन्तिम संस्कार के लिये चिताओं के प्लेटफार्म का निर्माण करना पड़ा। जहां एक और कोरोना मृतको के परिजन कई कई दिन तक अंतिम संस्कार कराने को तरसे वहीं लकड़ी की भी भारी कमी देखी गई। निगम बोध घाट जैसे मुख्य केंद्रों पर रात को भी चिता जलाना अनिवार्य करना पड़ा।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जय प्रकाश ने बताया कि निगम की तीन कोविड-19 श्मशान भूमियों में अब ईट से बनी हुई छह भठ्ठियों का निर्माण किया जा रहा है। पंचकुइया, इंद्रपुरी औऱ मंगोलपुरी शमशान में दो-दो भठ्ठियां बनाई जा रही है। जहां सामान्य अंतिम से संस्कार में 4 से 5 क्विंटल लकड़ी लगती है वहीं इन भठ्ठियों में केवल 1 क्विंटल लकड़ी लगती है। महापौर ने कहा की इन भठ्ठियों में तापमान 1000 डिग्री से अधिक होने के कारण दाह संस्कार केवल 50 से 60 मिनट में हो सकेगा। सामान्य दाह संस्कार में 4-5 से अधिक घंटे लगते हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि इस भट्टी में एक छोटे से कमरे का निर्माण किया जाता है और उसके अंदर लोहे और स्टील की सतह लगाई जाती है। इस छोटी सी भट्टी के छत पर एक धुआं निकलने के लिए चिमनी भी छोड़ी जाती है। अधिकारी बताते हैं कि इन भठ्ठियों का डिज़ाइन आई आई टी एक्स्पर्ट ने तैयार किया है।

पिछले दिनों में ऐसा देखा गया कि दिल्ली के शमशान भूमियों मेंलकड़ी की कमी पाई गई। दिल्ली नगर निगम को पड़ोसी राज्यों और वन विभाग से संपर्क करना पड़ा ताकि पेड़ काटे जा सकें और लकड़ियों की आपूर्ति जारी रह सके। अधिकारी कहते हैं कि अगर यदि इस प्रकार की भठ्ठियों का व्यापक स्तर पर निर्माण किया जाए तो दिल्ली के श्मशान भूमि में लगने वाली लकड़ियों की लागत 75% कम हो जाएगी।

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इस महामारी के दौरान दिल्ली के श्मशान भूमियों के इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी विस्तार देखा गया है। जहां की कड़कड़डूमा, ग्रीन पार्क, और सुभाष नगर स्थित श्मशान भूमियों में सीएनजी आधारित शवदाह प्रणाली लगाई गई हैं। वहीं कई स्थानों पर लकड़ी पर आधारित शव दाह के लिए सैकड़ों प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है। पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने बताया कि आने वाले दो दिनों में ग़ाज़ीपुर शमशान भूमि में दो सीएनजी आधारित भठ्ठियों का काम पूरा कर लिया जाएगा